सुमित पटवाल हत्याकांड में तीनों आरोपी बरी
नैनीताल। कोटद्वार के चर्चित प्रॉपर्टी डीलर सुमित पटवाल हत्याकांड में नैनीताल हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए तीनों आरोपियों को बरी कर दिया है।
न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को अपर्याप्त और कमजोर मानते हुए विशाल उर्फ जॉली, जोनी शर्मा और दीपक सिंह रावत को दोषमुक्त करने का आदेश दिया।
मामला 22 मार्च 2015 का है, जब कोटद्वार के बेलाघाट क्रॉसिंग पर बाइक सवार हमलावरों ने सुमित पटवाल की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
निचली अदालत ने विशाल और जोनी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि दीपक रावत को भी हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया था। चौथे आरोपी सुरेंद्र सिंह की अपील लंबित रहते हुए मृत्यु हो चुकी थी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सीसीटीवी फुटेज की वैधता पर सवाल उठाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत आवश्यक प्रमाण पत्र के बिना इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा पहचान मेमो में गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाए गए, जिससे अभियोजन की कहानी कमजोर हुई।
कोर्ट ने यह भी माना कि मामले में कोई भी प्रत्यक्षदर्शी गवाह अभियोजन के पक्ष में खड़ा नहीं हुआ। कई गवाहों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे जबरन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। हथियारों की बरामदगी को भी कोर्ट ने निर्णायक नहीं माना, क्योंकि पिस्तौल सार्वजनिक स्थानों से बरामद की गई थीं।
फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी खामियां पाई गईं। कोर्ट के अनुसार, गोलियों की सुरक्षित अभिरक्षा की कड़ी स्पष्ट नहीं थी, जिससे फॉरेंसिक साक्ष्य का लाभ अभियोजन को नहीं मिल सका। साथ ही मृतक द्वारा कथित रूप से लिखी गई चिट्ठी को भी कोर्ट ने दुश्मनी का ठोस आधार मानने से इनकार कर दिया।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ आरोपियों को देते हुए तीनों को तत्काल जेल से रिहा करने के आदेश दिए हैं। यह फैसला कोटद्वार और प्रदेश की न्यायिक प्रक्रिया में एक अहम मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।



