उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था, जनसुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियां, पढ़ें चार बड़ी खबरें….
देहरादून। उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से सामने आई घटनाएं यह दिखाती हैं कि राज्य में कानून-व्यवस्था, जनसुरक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था और वन्यजीव संरक्षण जैसे मुद्दे एक साथ चर्चा के केंद्र में हैं।
कहीं अस्पताल में विवाद कानून का विषय बन गया है, तो कहीं कड़ाके की ठंड में परीक्षाएं छात्रों के स्वास्थ्य पर सवाल खड़े कर रही हैं। वहीं, आगजनी की घटनाएं और वन्यजीव तस्करी पर कार्रवाई प्रशासन की सतर्कता और चुनौतियों दोनों को उजागर करती हैं।
अल्मोड़ा जिले में जिला चिकित्सालय में कर्मचारियों और एक ग्रामीण के बीच हुए विवाद ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल कर्मचारियों ने ग्रामीण नरेंद्र सिंह बिष्ट पर अभद्रता, गाली-गलौज और सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए कोतवाली में तहरीर दी है।
कर्मचारियों का कहना है कि आरोपी ने नकदी काउंटर में हाथ डालने का प्रयास किया और मोबाइल से वीडियो बनाकर कर्मचारियों को धमकाया, जिससे अस्पताल में मौजूद मरीजों और तीमारदारों को परेशानी हुई।
दूसरी ओर, ग्रामीण नरेंद्र सिंह बिष्ट ने भी अस्पताल कर्मचारियों पर मारपीट और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और मामले की विवेचना एसआई दिनेश परिहार को सौंपी गई है।
कड़ाके की ठंड में परीक्षाएं, छात्रों के स्वास्थ्य पर संकट
पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग महाविद्यालय में कड़ाके की ठंड के बीच आयोजित परीक्षाओं ने उच्च शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। माइनस चार डिग्री तापमान में बीए प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान दो छात्राएं ठंड लगने से बेहोश हो गईं।
परीक्षा कक्ष में अफरा-तफरी मच गई और छात्राओं को धूप में ले जाकर गर्म चाय पिलाई गई। छात्राओं के होश में आने के बाद ही कॉलेज प्रशासन ने राहत की सांस ली। अभिभावकों और छात्र संगठनों ने ठंड के मौसम में परीक्षाएं कराने पर नाराजगी जताई है।
पूर्व छात्र संघ पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से ठंड में परीक्षा न कराने की मांग की है। प्राचार्य प्रो. बीएम पांडेय ने बताया कि ठंड को देखते हुए पहले ही उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजा गया था, लेकिन इसके बावजूद परीक्षाएं जारी हैं और परीक्षा कक्षों में हीटर की कोई व्यवस्था नहीं है।
आगजनी की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में आगजनी की दो अलग-अलग घटनाओं ने लोगों में दहशत फैला दी। ट्रांजिट कैंप थाना क्षेत्र की कृष्णा कॉलोनी में खाना बनाते समय गैस सिलेंडर में आग लग गई, जिसमें एक महिला और आठ वर्षीय बच्ची झुलस गईं।
आग इतनी तेज थी कि घर में खड़ी बाइक भी जलकर राख हो गई। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण गैस लीकेज बताया जा रहा है।
इसी के साथ रुद्रपुर के तीनपानी क्षेत्र में टायर के एक गोदाम में भीषण आग लग गई। आग लगने से सैकड़ों टायर जलकर राख हो गए और गोदाम पूरी तरह ध्वस्त हो गया। फायर ब्रिगेड की कई टीमों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
गोदाम मालिक के अनुसार नुकसान का आकलन किया जा रहा है, जबकि अग्निशमन विभाग आग लगने के कारणों की जांच कर रहा है।
वन्यजीव तस्करी पर बड़ी कार्रवाई
नैनीताल और देहरादून में एसटीएफ, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में वन्यजीव तस्करी का बड़ा खुलासा हुआ है। नैनीताल के पैंगोट क्षेत्र से दो गुलदार की खाल और भारी मात्रा में हड्डियों के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार आरोपी महेश सिंह कपकोटी बागेश्वर का रहने वाला है और लंबे समय से वन्यजीव अंगों की तस्करी में शामिल बताया जा रहा है। बरामद खालें करीब छह महीने पुरानी बताई जा रही हैं।
आरोपी के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार इस नेटवर्क में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों से आई ये घटनाएं राज्य की जमीनी हकीकत को सामने लाती हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में विवाद, शिक्षा व्यवस्था में मौसम के अनुरूप निर्णयों की कमी, आगजनी जैसी आपदाएं और वन्यजीव तस्करी जैसे संगठित अपराध प्रशासन के लिए बड़ी चुनौतियां हैं।
हालांकि, पुलिस, फायर ब्रिगेड और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई यह भी दर्शाती है कि व्यवस्था सक्रिय है। इन मामलों से यह साफ होता है कि बेहतर समन्वय, संवेदनशील प्रशासन और समय पर नीतिगत फैसले ही जनता का भरोसा मजबूत कर सकते हैं।



