दून नगर निगम में टेंडर घोटाले की पुष्टि, सभी विकास कार्यों पर लगी रोक
देहरादून। दून नगर निगम में विकास कार्यों के टेंडर को लेकर चल रहा विवाद अब बड़े प्रशासनिक फैसले तक पहुंच गया है।
टेंडर सूची में गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद नगर आयुक्त नमामि बंसल ने नगर निगम के सभी विकास कार्यों के टेंडर पर तत्काल रोक लगा दी है। साथ ही, सभी प्रस्तावित और स्वीकृत विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन शुरू कर दिया गया है।
जांच में सामने आई गंभीर खामियां
दरअसल, देहरादून नगर निगम के विकास कार्यों की टेंडर सूची में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद इसकी जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कुछ विकास कार्य गलत तरीके से टेंडर सूची में शामिल कर दिए गए थे।
इनमें से कई कार्य अन्य विभागों द्वारा पहले ही पूरे किए जा चुके थे, जबकि कुछ कार्य नगर निगम की ओर से पूर्व में ही संपन्न हो चुके थे। इसके बावजूद उनके लिए दोबारा टेंडर जारी कर दिए गए।
महापौर कोटे से जारी हुई थी सूची
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह महापौर कोटे से नगर निगम के सभी 100 वार्डों में प्रस्तावित विकास कार्यों की टेंडर सूची जारी की गई थी। इसके बाद कई पार्षदों ने सूची पर आपत्ति जताई थी।
पार्षदों का आरोप था कि कुछ वार्डों में 20 से 22 लाख रुपए के कार्य स्वीकृत किए गए, जबकि कुछ वार्डों में 70 से 80 लाख रुपए तक के कार्य शामिल कर दिए गए, जिससे असमानता सामने आई।
विवाद बढ़ने पर महापौर सौरभ थपलियाल और नगर आयुक्त नमामि बंसल ने शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जांच समिति गठित की। समिति की जांच में सामने आया कि कई कार्य गलत तरीके से टेंडर सूची में शामिल किए गए थे।
इन विकास कार्यों के लिए दोबारा जारी हुए थे टेंडर
- वार्ड 4: चालांक गांव में शिव मंदिर से समीर पुंडीर के घर तक सीसी सड़क निर्माण
- वार्ड 52: सरस्वती विहार, रेलवे फाटक के पास पार्क की रंगाई-पुताई और मरम्मत
- वार्ड 90: मोहब्बेवाला में पाइप लाइन डालने और सड़क निर्माण
- वार्ड 79: सुभाष नगर और कृष्णा विहार में सीसी सड़क व नाली निर्माण
- वार्ड 68: मियांवाला बुरांश कुंज कॉलोनी में पुलिया और सड़क निर्माण
- वार्ड 83: केदारपुर और कुंज विहार में सामुदायिक भवन निर्माण
नगर आयुक्त ने क्या कहा?
नगर आयुक्त नमामि बंसल ने बताया कि मेयर निधि के अंतर्गत जारी विकास कार्यों की सूची में कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इसी क्रम में जांच समिति द्वारा परीक्षण किया गया है। अब प्रत्येक विकास कार्य का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य के शुरू होने से पहले धरातल की स्थिति की जियो-टैग फोटो ली जाएगी और कार्य पूरा होने के बाद भी तस्वीरें फाइल में संलग्न की जाएंगी। जांच में कुछ कार्यों में रिपीटेशन और अन्य विसंगतियां पाई गई हैं, जिन पर कार्रवाई की जाएगी।
नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि सत्यापन के बाद जो संशोधित विकास कार्यों की सूची दोबारा प्रस्तुत की जाएगी, उसी के आधार पर आगे की टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।



