विशेष रिपोर्ट: मातम, सवाल और सियासत! झील से शव, सड़कों पर न्याय की मांग

मातम, सवाल और सियासत! झील से शव, सड़कों पर न्याय की मांग

उत्तराखंड में शनिवार को हालात एक बार फिर संवेदनशील हो गए। नैनीताल में 9 दिनों से लापता युवक का शव नैनीझील से मिलने से जहां शहर में शोक का माहौल है।

वहीं दूसरी ओर अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उठे नए सवालों ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है। प्रदेश के कई जिलों में कांग्रेस, महिला कांग्रेस और छात्र संगठनों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सीबीआई जांच और कथित वीआईपी के नाम उजागर करने की मांग तेज कर दी है।

नैनीताल के ठंडी सड़क क्षेत्र स्थित शनिदेव मंदिर के पास शनिवार सुबह झील में एक शव उतराता देख राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी। मल्लीताल कोतवाली पुलिस ने स्थानीय नाविकों की मदद से शव बाहर निकाला।

शव की पहचान 20 वर्षीय रोहन के रूप में हुई, जो 25 दिसंबर से लापता था। परिजनों की शिकायत पर पहले ही गुमशुदगी दर्ज थी। शव मिलने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया, जबकि पुलिस ने पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू कर दी है।

इधर, अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उर्मिला सनावर के वीडियो सामने आने के बाद फिर से सवाल खड़े हो गए हैं। मामले की जांच कर चुकी एसआईटी के सदस्य रहे और वर्तमान में हरिद्वार ग्रामीण के एसपी शेखर सुयाल ने कहा कि इस केस की जांच को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने सही ठहराया है।

उन्होंने दावा किया कि जांच के दौरान किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई और सभी सबूत अदालत में पेश किए गए, जिसके आधार पर तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

हालांकि, कांग्रेस इन दावों से सहमत नहीं है। पौड़ी, श्रीनगर, ऋषिकेश, रामनगर, रुद्रपुर और देहरादून समेत कई स्थानों पर कांग्रेस, महिला कांग्रेस और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर सरकार पर आरोप लगाया कि अंकिता मामले में अब भी कई सवालों के जवाब नहीं दिए गए हैं।

प्रदर्शनकारियों ने कथित वीआईपी के नाम सार्वजनिक करने और मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग दोहराई। कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

इसी बीच, राज्य की राजनीति उस वक्त और गरमा गई जब महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू के बिहार की महिलाओं पर दिए बयान को लेकर बिहार महिला आयोग ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की।

कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरा, जबकि भाजपा ने बयान की निंदा करते हुए साहू से खुद को अलग बताया।

सामाजिक स्तर पर भी बदलाव की तस्वीर सामने आई है। नैनीताल जिले के बिंदुखत्ता क्षेत्र के शीशम भुजिया गांव में ग्रामीणों ने नशे के खिलाफ बड़ा फैसला लेते हुए शराब सेवन पर 11 हजार रुपये जुर्माना और सामाजिक बहिष्कार लागू करने का निर्णय लिया है, जिसे प्रशासन ने सकारात्मक पहल बताया है।

एक ओर नैनीताल में मातम है, तो दूसरी ओर न्याय, जवाबदेही और व्यवस्था को लेकर सड़क से सदन तक सवाल उठ रहे हैं। उत्तराखंड एक बार फिर संवेदनशील मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है।