मुस्लिम युवा संगठन ने फूंका त्रिपुरा के मुख्यमंत्री का पुतला। जताया विरोध

मुस्लिम युवा संगठन ने फूंका त्रिपुरा के मुख्यमंत्री का पुतला। जताया विरोध

देहरादून। मुस्लिम युवा संगठन देहरादून उत्तराखंड के संस्थापक नवाज़ कुरैशी ने कहा कि, बीते कई दिनों से त्रिपुरा में मस्जिदों पर हो रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए आज (देहरादून) उत्तराखंड में बड़ी संख्या में मुस्लिम युवा संगठन के कार्यकर्ता व शहर के मोज़िज लोगो द्वारा तहसील चौक पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री का पुतला फूंका।

इस अवसर पर नवाज़ कुरैशी संस्थापक मुस्लिम युवा संगठन ने कहा कि, देश में फिरकाप्रस्तों द्वारा की जा रही सियासत अब सब से नीचे के पायदान पर चली गई है।

उन्होंने कहा कि, भारतीय मुसलमानों ने हमेशा ही सच और हक की बात कही है, पिछले दिनों जब कश्मीर और पाकिस्तान, बांग्लादेश में हिंदू-सिख भाइयों के साथ जुल्म हुआ तो मुसलमानों ने भी पाकिस्तान की निंदा की, लेकिन त्रिपुरा में बांग्लादेश में हुई हिंसा को बहाना बना कर मस्जिदों पर किए जा रहे हमले अफसोसजनक और देश के लिए शर्म की बात है।

नवाज़ कुरैशी ने कहा कि, देश का नेशनल मीडिया इस मामले में ऐसे खामोश है कि, मानो कुछ हुआ ही नहीं है। आज जो लोग धर्म के नाम पर हिंसा का खामोश समर्थन कर रहे है वो याद रखें कि, शरारती तत्व और आतंकी किसी के मित्र नहीं होते, वो समय के साथ अपने स्वार्थों के लिए किसी को भी निशाना बनाते हैं।

नवाज़ कुरैशी ने कहा कि, त्रिपुरा सरकार खामोशी से तमाशा देख रही है। यह उनके लिए शर्म से डूब मरने वाली बात है कि, सरकार दंगाइयों पर काबू नहीं कर पा रही है।

उन्होने कहा कि, अब तो सरकारों को ज्ञापन देते हुए भी शर्म आती है कि, यह सत्ता में बैठे लोग फिरक़ापरस्ती का चश्मा पहन चुके हैं, लेकिन याद रहे कि सत्ता आनी-जानी है।

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सरकार चाहे जुल्म पर खामोश हो जाए लेकिन हम देश भर में पूरी ताकत के साथ सच की आवाज उठाते रहेंगे और आवाज ए हक के सामने हमेशा जालिम को झुकना ही पड़ता है।

नवाज़ कुरैशी ने कहा कि, हम भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद जी से मांग करते हैं कि, त्रिपुरा में हो रहे दंगों को फौज द्वारा बंद करवा कर शांति स्थापित की जाए और नाकाम हो गई राज्य सरकार को बर्खास्त कर दिया जाए।

इस मौके पर प्रदर्शनकारी त्रिपुरा सरकार मुर्दाबाद, फिरकापरस्त मुर्दाबाद, गुंडागर्दी बंद करो जैसे नारे लगा रहे थे।

इस मौके पर वरिष्ठ राज्य आंदोलन कारी लताफ़त हुसैन, संस्थापक मुस्लिम युवा संगठन नवाज़ कुरैशी, रीठा मंडी पार्षद इतात ख़ान, वसीम, दानिश कुरैशी, आसिफ़ हुसैन, जुनैद अंसारी अधिकारी, इफ्तेखार, जराफात कुरैशी, अर्श सिद्दकी, हिलाल ख़ान, अब्दुल रज़्ज़ाक, शोएब, अमान कुरैशी, आज़म ख़ान, कारी इस्माइल, निक्का मंसूरी, शबलु ख़ान, जीशान अली, फरमान अली, जावेद ख़ान, नद्दु, फ़हीम ख़ान, आदि भारी संख्या मुस्लिम समुदाय के लोग मौजूद रहे।