Exclusive: सीएम त्रिवेन्द्र रावत तीन वर्षो में बगैर किसी विवाद के सरकार चलाने में रहे सफल

सीएम त्रिवेन्द्र रावत तीन वर्षो में बगैर किसी विवाद के सरकार चलाने में रहे सफल

 

रिपोर्ट- कैलाश जोशी (अकेला)
देहरादून। उत्तराखंड के मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत को ले कर उत्तराखंड में इन दिनों राजनैतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है। किन्तु चर्चाओं के बीच जो खबर निकल कर आ रही है वह बड़ी दिलचस्प है। लगातार शोशल मीडिया पर जिस तरह से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हटने की ख़बरों का कुछ लोग एक तरह से प्रमोशन करते नजर आ रहे है, वही खबर इसके उलट है। जिस प्रकार से राज्य गठन के बाद आज तक भाजपा में त्रिवेंद्र रावत जैसा कार्यकाल किसी और मुख्यमंत्री का नहीं गया है। लगभग तीन वर्ष बीतने को है किन्तु इन तीन वर्षो में त्रिवेंद्र रावत बगैर किसी विवाद के सरकार को चलाने में सफल रहे है।

 

दिलचस्पी का विषय है कि, देश-दुनिया में उत्तराखंड को पहचान दिलाने वाले 17 युवाओं को सम्मान और प्रदेश के समग्र विकास पर रायशुमारी के साथ अल्मोड़ा में युवा सम्मेलन ‘मेरे युवा-मेरी शान’ जैसे कार्यक्रम सफल रहे है। प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने युवाओं से उत्तराखंड के विकास में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान भी पूर्व में किया था। सीएम ने युवाओं की मदद से उत्तराखंड को आगे बढ़ाने का मूल मंत्र देते हुये कहा था कि, आत्मनिर्भर युवाओं की मदद से ही सशक्त उत्तराखंड बनेगा।

 

सीएम त्रिवेंद्र रावत ने पलायन पर गहरी चिंता जतायी थी। साथ ही प्रदेश में रोजगार व बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दों पर भी त्रिवेंद्र सरकार का ध्यान है। उत्तराखंड में पलायन से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र अल्मोड़ा है। इसके बाद दूसरे नंबर पर आने वाला पौड़ी गढ़वाल उनका अपना गृहजिला है। सीएम ने कहा कि, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, रोजगार-स्वरोजगार के नये अवसरों के जरिये सरकार पलायन पर रोक की हरसंभव कोशिश कर रही है। वही सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने युवाओं में नशे के बढ़ते असर पर भी चिंता जतायी थी। अब अगर गौर किया जाय तो प्रदेश में जब से भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार बनी है तब से लेकर आज तक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व में काफी हद तक विकास कार्यों को गति मिली है।

 

जिस तरह से त्रिवेंद्र रावत इन दिनों अपने राज्य के विकास के लिए उत्तराखंड से दिल्ली जा कर केंद्र सरकार के मंत्रियों के साथ सामंजस्य बिठा कर प्रदेश के विकास को तेजी से आगे लाने के प्रयास कर रहे है। वह उत्तराखंड के लिए शुभ संकेत दिखाई दे रहे है। अटल आयुष्मान योजना में राज्य के समस्त परिवारों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक वार्षिक निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। हम घर-घर तक बिजली पहुंचा चुके हैं। यह कहना है प्रदेश के मुख्यमंत्री का। उत्तर भारत में हम सबसे कम दरों पर बिजली दे रहे हैं। नदियों व जलस्त्रोतों को पुनर्जीवित करने की पहल बड़े स्तर पर की गई है, जिसमे कई योजनाओं पर कार्य गतिमान है ।

 

हर जिले में एक वाटरशेड पर काम किया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में क्लस्टर आधारित एप्रोच पर ग्रोथ सेंटर विकसित कर रहे हैं। 58 ग्रोथ सेंटरों को मंजूरी दी जा चुकी है। सबसे बड़ी बात यह है कि, प्रदेश के मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत अपने इन तीन सालों के कार्यकाल को बिना किसी विवाद के निकाल चुके है। अब केवल जरुरत है तो संगठन व पार्टी के बीच मंथन की। जिससे की २०२२ फतह हो सके। बारहाल प्रदेश में राजनीती की गाडी अच्छी रफ़्तार से चल रही है। विकास कार्योँ में भी तेजी दिखाई दे रही है। विधानसभा में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद बीते साल 18 मार्च को त्रिवेन्द्र सिंह रावत की सरकार सत्ता में आई।

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उस दिन मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सात कैबिनेट व दो राज्य मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। विधानसभा की कुल 70 में से 57 सीटों पर भाजपा के जीत हासिल करने के बावजूद मंत्रिमण्डल के दो पदों को रिक्त रखकर त्रिवेन्द्र रावत ने सभी को अचंभित कर रखा है। तब से लेकर अभी तक ये दोनों ही पद रिक्त हैं। जिनके भरे जाने को लेकर अक्सर कयास लगाये जाते हैं। उत्तरखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के द्वारा जिन भी जन मुद्दों पर कार्य किया जा रहा है वे असल मुद्दों पर आधारित है। उनके द्वारा किये गए कार्यों की जनता भी तारीफ़ कर रही है। राजनीती में कोई भी खुद को कोई किसी से कमतर आंकने को तैयार नहीं है। अपनी दावेदारी को जस्टिफाई करने के लिए किसी ने क्षेत्र तो किसी ने जातीय संतुलन को आधार बनाया। नये विधायकों ने नये चेहरों को मौका देने की बात की।

 

भाजपा नेताओं में कुछ इसी तरह की स्थिति सरकार में दायित्व पाने को लेकर भी है। संगठन से जुड़े नेताओं को सरकार में दायित्व देने के लिये भी मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत पर भी खासा दबाव है। देखना दिलचस्प होगा कि, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र कब तक रिक्त मंत्री पदों और दायित्वों के बंटवारे पर फैसला लेते हैं। यह तो मानना होगा कि, जब से राज्य में त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व में भाजपा की सरकार आई है तब से लेकर आज तक प्रदेश में भ्रस्टाचार पर नकेल तो लगी है। नहीं तो पूर्व का आलम तो जग जाहिर रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि, जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है, वैसे-वैसे त्रिवेंद्र सिंह रावत राजनीती में मंझे हुवे खिलाडी की तरह से निकल कर बैटिंग करते हुवे दिखाई दे रहे है।

 

सीएम डैशबोर्ड उत्कर्ष, सीएम हेल्पलाइन 1905 और सेवा का अधिकार से कार्य संस्कृति में सुधार लाया जा रहा है। सड़क, रेल और हवाई क्नेक्टिविटी में अभूतपूर्व काम किया गया है। ऑल वेदर रोड व भारतमाला योजना पर तेजी से काम चल रहा है। 14 वर्षों से लटका टिहरी स्थित डोबरा चांठी मोटर झुला पुल मार्च 2020 में चालू हो गया है। ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेलमार्ग पर काम तेजी से हो रहा है। जौलीग्रांट एयरपोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाया जा रहा है। पंतनगर व पिथौरागढ़ के लिए सस्ती हवाई सेवा प्रारंभ कर दी गई है। कुपोषण को दूर करने के लिए कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनकी समुचित देख-रेख का अभियान शुरू किया गया है।

 

वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 11 हजार से अधिक उद्यमों की स्थापना हुई है। इनमें लगभग 80 हजार लोगों को रोजगार मिला है। इन्वेस्टर्स समिट होने के केवल 10 माह की अवधि में लगभग 17 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ। संशोधित सौर ऊर्जा नीति 2018 जारी की गई है। इसमें 5 मेगावाट तक की सौर ऊर्जा परियोजना, पर्वतीय क्षेत्रों के स्थायी निवासियों के माध्यम से स्थापित की जा सकती हैं। इन उपलब्धियों के साथ सरकार के लगभग तीन वर्ष पुरे होने को आ रहे है। ऐसे में भाजपा से जनता भी उम्मीद लगाई बैठी है कि उत्तराखंड में भी क्या अच्छे दिन आएंगे?