कल्याणी-बेराधार मोटरमार्ग पर बीते 3 माह से हो रहा अवैध रूप से क्रेशर संचालन

कल्याणी-बेराधार मोटरमार्ग पर बीते 3 माह से हो रहा अवैध रूप से क्रेशर संचालन

 

– स्थानीय प्रशासन ध्रुवीय भालू की निंद्रा में….
– सीज होने बाद भी चलता रहा क्रेशर….

सुभाष पिमोली
चमोली। देवाल विकासखण्ड में ठेकेदार की मनमानी इतनी हावी है कि, पिछले लगभग 3 माह से बिना अनुमति के ही क्रेशर चला कर प्रशासन को मुंह चिढ़ाया जा रहा है। अब इसे प्रशासन की लापरवाही कहें या ठेकेदार की दबंगई। देवाल विकासखण्ड के हाट कल्याणी-बेराधार मोटरमार्ग पर पिछले 3 माह से अवैध रूप से क्रेशर का संचालन हो रहा है, और स्थानीय प्रशासन गहरी नींद में सो रहा है। ऐसा नहीं है कि, स्थानीय प्रशासन को अभी तक इसकी कोई जानकारी नहीं है।

 

बता दें कि, इससे पहले भी मीडिया में खबर छपी थी, जिसका असर ये हुआ कि, उपजिलाधिकारी थराली ने मौके पर जाकर क्रेशर सीज कर दिया और जिला प्रशासन ने भी खबर का संज्ञान लेते हुए उपजिलाधिकारी द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर ठेकेदार पर दो लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया। लेकिन सड़क निर्माण का कार्य करा रहे ठेकेदार की हनक इतनी हावी रही की इस जुर्माने के बाद भी क्रेशर संचालक द्वारा नियमों को ताक पर रखकर सीज क्रेशर को संचालित किया जा रहा है। निर्माणकार्य में ठेकेदार के अधीन लगे ट्रेक्टर चालक ने बताया कि पिछले लम्बे समय से क्रेशर यहां संचालित हो रहा है।

 

दरसल देवाल के हाट कल्याणी मोटरमार्ग पर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत मोटरमार्ग का निर्माण कार्य चल रहा है, और ठेकेदार की ओर से सड़क पर पार्ट 2 का कार्य किया जा रहा है। मार्ग की लंबाई 8 किमी है। सड़क पर सोलिंग के कार्य के लिए ठेकेदार ने बिना प्रशासन से अनुमति मांगे ही क्रेशर लगा दिया और इसमें रोड़ी और बजरी क्रश करने के लिए आसपास से ही खनन कर इसका इस्तेमाल सड़क निर्माण कार्य में किया जा रहा है। जिससे नियमो को ताक पर रखते हुए सरकार को राजस्व का भी चूना लगाया जा रहा है। साथ ही बिना गुणवत्ता के पत्थरों को सड़क पर बिछाया जा रहा है। हालांकि स्थानीयों द्वारा मिली शिकायत के आधार पर उपजिलाधिकारी थराली ने दो दिन पहले ही मौके का निरीक्षण किया और उनके मुताबिक उन्होंने इस निरीक्षण में पाया की सीज होने के बावजूद ठेकेदार द्वारा क्रेशर का अवैध रूप से संचालन किया गया है।

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मीडिया को दी गई जानकारी में उन्होंने ये भी बताया कि, जैसे ही वे निरीक्षण के लिए बेराधार मोटरमार्ग पर पहुंचे तो वहां कार्य कर रहे मजदूर प्रशासन को देख भाग खड़े हुये। निरीक्षण के दौरान ऐसे प्रमाण मिले हैं कि, ठेकेदार द्वारा क्रेशर सीज होने के बावजूद भी क्रेशर का संचालन कर वहां के पत्थरों को अवैध रूप से क्रश किया गया है। जिस पर वन विभाग देवाल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जा चुकी है। देवाल बेराधार मोटरमार्ग पर ठेकेदार द्वारा गिराए गए पेड़ो और खनन की रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजने के बाद जिला प्रशासन अब ठेकेदार पर क्या कार्यवाही करता है ये देखने वाली बात होगी।

 

वही उपजिलाधिकारी थराली ने बताया कि, बिना अनुमति के चल रहे क्रेशर को सीज किया गया था और इस पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी ठेकेदार पर लगाया गया था। लेकिन स्थानीयों की शिकायत पर दोबारा उनके द्वारा मोटरमार्ग का निरीक्षण किया गया और निरीक्षण के दौरान ऐसे प्रमाण मिले हैं कि, ठेकेदार द्वारा सीज होने के बावजूद क्रेशर का संचालन किया गया है। वन विभाग देवाल से इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी गई है। संयुक्त रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजने के बाद ठेकेदार पर उचित कार्यवाही की जाएगी

 

वहीं सड़क निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे ठेकेदार के स्थानीय मुंशी ने कहा कि, उनके द्वारा क्रेशर लगाने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी। लेकिन अनुमति नही दी गई, काम तेजी से हो सके इसके लिए ठेकेदार द्वारा क्रेशर प्लांट लगाया गया है। वहीं अनुमति न मिलने के सवाल पर बोलते हुए सड़क निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे स्थानीय मुंशी ने बताया कि, विभाग ठेकेदार से जल्दी काम की अपेक्षा रखता है। लेकिन मशीनों के प्रयोग की अनुमति नहीं देता है। जल्दी निर्माण कार्य पूरा हो इसलिए ठेकेदार द्वारा क्रेशर मशीन का इस्तेमाल किया गया है।

 

इसी क्रम में देवाल विकासखण्ड के वनक्षेत्राधिकारी त्रिलोक सिंह बिष्ट ने बताया कि, ठेकेदार द्वारा उक्त मोटरमार्ग पर 9 हरे पेड़ो को क्षतिग्रस्त किया गया है। जिसके लिए लगभग 22 हजार रुपये का अर्थदंड/मुआवजा राशि के लिए ठेकेदार और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिशासी अभियंता को नोटिस भेजा जा चुका है। इस पूरे प्रकरण से एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि, इन दिनों थराली देवाल सहित आसपास के इलाकों में खनन माफियाओं के हौसले काफी बुलंद हैं।वरना प्रशासन द्वारा सीज किये जाने और अर्थदंड लगाए जाने के बावजूद पिछले एक माह से जिस तरह क्रेशर का संचालन किया जा रहा है। उससे इतना तो स्पष्ट हो जाता है कि, नियम कानूनों को ताक पर रखकर ठेकेदारों और खनन माफियाओं की फौज प्रशासन को मुंह चिढ़ा रही है।