श्रम विभाग की लापरवाही से जनता त्रस्त

श्रम विभाग की लापरवाही से जनता त्रस्त

 

देहरादून। हल्द्वानी श्रम विभाग के नकारे पन से पिछले दिनों से जनता को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बेहद दूर-दूर से आकर लोग घंटों समय बर्बाद कर फार्म जमा करते हैं। लेकिन श्रम विभाग मैं बैठे कर्मचारी कोई ना कोई कमी निकाल कर फार्म लौटा रहे हैं।

 

बता दें कि, इतना ही नहीं किन-किन कमियों को दुरुस्त करना है, ऐसा बताने की भी कोशिश नहीं की जाती है। बहरहाल श्रम विभाग के लापरवाह कर्मचारियों की कार्यशैली से जनमानस परेशान है। मामले में जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत भी की गई है।

 

गौरतलब है कि, श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिकों को सिलाई मशीन, साइकिल, टूल किट, या अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। जिसको लेकर के बड़ी दूर-दूर से लोग निश्चित दिन पर श्रम विभाग में पहुंचते हैं। श्रम विभाग हल्द्वानी के कार्यालय में गुरुवार और शुक्रवार 2 दिन निर्धारित किए गए हैं। लेकिन पिछले दो-तीन महीने से यहां का हाल बेहद बुरा है।

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आचार संहिता हटने के बाद जिस कक्ष में श्रम विभाग इन आवेदनों को लेता है, उन कक्ष में बिजली अथवा कंप्यूटर उपकरण संबंधी कार्य किए गए। जिसके चलते करीब 10 दिन तक लाभार्थियों को लाभ नहीं मिला। बड़ी दूर-दूर से लोग यहां पर आकर चक्कर काटते हैं। इसके बाद जवाब आचार संहिता भी खत्म हो गई है, और आवेदन जमा करने वाला कक्ष भी दुरस्त हो गया है, उसके बाद भी कई लोग निराश होकर लौट रहे हैं। वजह है कि, श्रम विभाग में जो अब नए फॉर्म जमा हो रहे हैं।

 

उसमें शपथ पत्र अनिवार्य किया गया है। यह सही भी है, लेकिन इसकी जानकारी श्रम विभाग कार्यालय से दी जानी चाहिए थी, लिहाजा जानकारी के अभाव में लोगों को परेशानी उठानी पड़ी है। इसका जिम्मेदार कौन है? कुल मिलाकर मामले में जिलाधिकारी कार्यालय को अवगत कराया जा चुका है। इधर लालकुआं क्षेत्र के विधायक नवीन दुमका का कहना है कि, वह इस संबंध में उप श्रम आयुक्त से वार्ता करेंगे। जबकि पूर्व मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल का भी कहना है कि, लोगों को बेवजह परेशानी हो रही है। यह उचित नहीं है।

 

इस संबंध में वे भी डीएलसी से वार्ता करेंगे। देखना है कि, लोगों को क्या परेशानी ऐसे ही उठानी पड़ेगी? या फिर इसका कोई समाधान निकल पाएगा। इधर श्रम विभाग कार्यालय बैठे सरोज नाम की कर्मचारी ने बताया कि, जैसे उन्हें विभागीय सूचना मिलती है। उसी अनुरूप कार्य करने को विवश हैं। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि, यह जानकारी प्रॉपर तरीके से लोगों को क्यों नहीं मिल पाती तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी।