2027 से पहले कांग्रेस में टिकट का ‘टेस्ट’, SIR पर घमासान और कुंजवाल के गढ़ में लगा बड़ा झटका
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस एक ओर सभी विधानसभा सीटों पर संभावित प्रत्याशियों के चयन के लिए इंटरनल सर्वे की तैयारी कर रही है।
दूसरी ओर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर पार्टी लगातार सरकार और निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है।
इसी बीच अल्मोड़ा के जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के भतीजे दिनेश कुंजवाल के कांग्रेस छोड़कर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) में शामिल होने से पार्टी को स्थानीय स्तर पर झटका लगा है।
टिकट के दावेदारों का होगा इंटरनल सर्वे
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह के मुताबिक आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण की प्रक्रिया के तहत सभी विधानसभा क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों और मौजूदा विधायकों का इंटरनल सर्वे कराया जाएगा।
इसमें नेताओं की क्षेत्र में सक्रियता, जनता के बीच छवि, संगठन के साथ समन्वय, पार्टी के प्रति समर्पण और जनसंपर्क जैसे पहलुओं को परखा जाएगा।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस में टिकट चयन के कई चरण होते हैं। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की ओर से भी एक आंतरिक सर्वे कराया जाता है, जिसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं होती। इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस स्तर पर भी सर्वे की प्रक्रिया होगी।
डॉ. प्रतिमा सिंह ने कहा कि सर्वे में यह देखा जाएगा कि कौन नेता पार्टी की विचारधारा को जनता तक पहुंचा रहा है, कौन संगठन को पर्याप्त समय दे रहा है और कौन अपने विधानसभा क्षेत्र में लोगों के सुख-दुख में उनके साथ खड़ा रहता है।
सर्वे की रिपोर्ट चयन समिति के सामने रखी जाएगी। इसके बाद संभावित नामों पर चर्चा होगी और अंतिम निर्णय केंद्रीय चुनाव समिति यानी CEC की बैठक में लिया जाएगा।
SIR को लेकर कांग्रेस के आरोप, 19 लाख मतदाताओं को नोटिस
दूसरी ओर उत्तराखंड में चल रही SIR प्रक्रिया कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव का नया मुद्दा बन गई है। कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची से वैध मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
हरिद्वार ग्रामीण से कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने आरोप लगाया कि उनकी विधानसभा क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा वैध मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि अब तक उनकी विधानसभा में 1,029 लोगों के नाम हटाने के लिए आवेदन किए जा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जीवित लोगों को मृत, जबकि कुछ मतदाताओं को अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया जा रहा है।
अनुपमा रावत ने चेतावनी दी कि यदि मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो वह जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में धरना देंगी और विधानसभा में भी मुद्दा उठाएंगी।
मसूरी में भी SIR की प्रक्रिया पर सवाल
मसूरी महिला कांग्रेस अध्यक्ष जसबीर कौर ने भी SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई लोगों को ऐसे नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिनमें आपत्ति का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। उन्होंने कहा कि कई लोगों से दशकों पुराने दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिससे खासकर बुजुर्गों को परेशानी हो रही है।
जसबीर कौर ने युवाओं के मतदाता अधिकारों को लेकर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि पात्र युवाओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज होने में दिक्कतें आ रही हैं।
SIR के आंकड़ों ने बढ़ाई सियासी हलचल
SIR के दौरान सामने आए आंकड़ों ने भी राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। प्रदेश में करीब 19 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। अब तक 12,209 वास्तविक आपत्ति आवेदन दर्ज किए गए हैं।
आंकड़ों के अनुसार, एक ही नाम से बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज हुई हैं। ‘नितिन’ नाम से 156 आपत्तियां दर्ज हैं। इसके अलावा विनीत गिरि गोसाई के नाम से 126, कार्तिक घीक के नाम से 125, अशोक प्रसाद के नाम से 113 और अभिषेक तिवारी के नाम से 104 आपत्तियां दर्ज हुई हैं।
टॉप-10 नामों से ही 1,124 आपत्तियां दर्ज हुई हैं। हालांकि एक ही नाम के कई अलग-अलग मतदाता हो सकते हैं, इसलिए केवल नाम की समानता के आधार पर इन्हें फर्जी नहीं माना जा सकता। फिर भी इतनी बड़ी संख्या में एक जैसे नामों पर आपत्तियां दर्ज होना जांच और सत्यापन का विषय जरूर बन गया है।
विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों में जसपुर 3,896 आपत्तियों के साथ सबसे ऊपर, जबकि किच्छा में 2,857, काशीपुर में 1,489, रुद्रपुर में 1,129 और रुड़की में 676 आपत्तियां दर्ज हुई हैं।
879 मामलों में आपत्ति लगाने वाला और मतदाता एक ही
SIR के आंकड़ों में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। 879 ऐसे आवेदन मिले हैं, जिनमें आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति का नाम और जिस मतदाता के खिलाफ आपत्ति दर्ज की गई है, उसका नाम एक ही है। यह कुल 12,209 वास्तविक आपत्तियों का करीब 7.2 प्रतिशत है।
सबसे ज्यादा 8,166 आपत्तियां उन मतदाताओं के संबंध में हैं, जिन्हें अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है। इसके अलावा 2,872 आपत्तियां पहले से नाम दर्ज होने, 730 स्थायी रूप से स्थानांतरित, 286 मृत मतदाताओं और 110 कम उम्र के मतदाताओं से संबंधित हैं।
हालांकि निर्वाचन प्रक्रिया में आपत्ति दर्ज होना अपने आप में मतदाता का नाम हटने का प्रमाण नहीं है। आपत्तियों और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
खड़गे के दौरे के बाद कांग्रेस को जागेश्वर में झटका
इसी राजनीतिक माहौल के बीच कांग्रेस को अल्मोड़ा के जागेश्वर विधानसभा क्षेत्र में बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के भतीजे दिनेश कुंजवाल ने कांग्रेस छोड़कर उत्तराखंड क्रांति दल का दामन थाम लिया है। उनके साथ बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के भी यूकेडी में शामिल होने की बात सामने आई है।
दिनेश कुंजवाल का पार्टी छोड़ना इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जागेश्वर को लंबे समय से कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है और कुंजवाल परिवार की क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत पकड़ रही है। ऐसे में चुनाव से पहले इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की स्थानीय संगठनात्मक स्थिति को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
यूकेडी भी उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति में अपनी खोई जमीन वापस हासिल करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में कांग्रेस के प्रभाव वाले जागेश्वर क्षेत्र में कुंजवाल परिवार से जुड़े व्यक्ति का यूकेडी में जाना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना
SIR को लेकर कांग्रेस के आरोपों को भाजपा ने खारिज किया है। भाजपा नेता जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि कांग्रेस चुनाव से पहले ही अपनी हार मान चुकी है और SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोप उसी की बौखलाहट का परिणाम हैं। उनका आरोप है कि कांग्रेस खुद फर्जी आपत्तियां दर्ज करा रही है और उसका आरोप भाजपा पर लगा रही है।
फिलहाल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस एक तरफ टिकट के लिए नेताओं की जमीनी पकड़ और सक्रियता परखने की तैयारी कर रही है।
वहीं SIR को लेकर उठ रहे सवाल और जागेश्वर में पार्टी से नेताओं के अलग होने की घटनाएं उसके सामने नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर रही हैं।


