बिग ब्रेकिंग: उत्तराखंड पर बारिश का डबल अलर्ट! 12 जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा, चमोली में जलसैलाब से टूटा संपर्क

उत्तराखंड पर बारिश का डबल अलर्ट! 12 जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा, चमोली में जलसैलाब से टूटा संपर्क

रिपोर्ट- गिरीश चंदोला
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून के बीच लगातार हो रही भारी बारिश ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के हाइड्रोमेट डिवीजन स्थित फ्लैश फ्लड गाइडेंस सेल ने प्रदेश के लिए अगले 24 घंटे का फ्लैश फ्लड रिस्क बुलेटिन जारी किया है।

इसके मुताबिक 11 अगस्त 2026 की शाम 5:30 बजे तक राज्य के 12 जिलों में कुछ जलग्रहण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में कम से मध्यम स्तर के फ्लैश फ्लड का खतरा बना हुआ है।

बुलेटिन के अनुसार अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पौड़ी गढ़वाल के कुछ हिस्से फ्लैश फ्लड के लिहाज से संवेदनशील हैं।

अत्यधिक ढीली मिट्टी, निचले इलाकों और जलग्रहण क्षेत्रों में तेज बारिश के चलते सतही जल बहाव और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

चमोली में जलसैलाब ने बढ़ाई चिंता

फ्लैश फ्लड के खतरे के बीच चमोली जिले में सोमवार को सामने आई घटना ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमक नाले में अचानक जलसैलाब आने से एक वैली ब्रिज और वाहन बह गया।

इस घटना में एक बीआरओ कर्मी के लापता होने की सूचना है। जलसैलाब के बाद मलारी से आगे आवाजाही बाधित हो गई और चीन सीमा से सटे सीमांत गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ।

इस घटना ने पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बढ़ने वाले जलप्रवाह के खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है। मौसम विभाग की फ्लैश फ्लड चेतावनी के बीच अब प्रशासन की नजर ऐसे सभी नालों, गदेरों और जलधाराओं पर है, जहां कम समय में तेज बारिश के बाद हालात बिगड़ सकते हैं।

चार जिलों में ऑरेंज, सात में येलो अलर्ट

मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए अलर्ट जारी किया है। देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और चंपावत में ऑरेंज अलर्ट बताया गया है। वहीं उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, चमोली, पिथौरागढ़ और ऊधम सिंह नगर में येलो अलर्ट जारी किया गया है।

लगातार बारिश के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़क बंद होने, जलभराव और नदियों-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका बनी हुई है। संवेदनशील मार्गों पर जेसीबी और अन्य जरूरी मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा जा रहा है।

24 घंटे निगरानी, जिलों से लगातार समन्वय

उत्तराखंड आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव **विनोद कुमार सुमन** ने कहा कि मौसम विभाग और अन्य तकनीकी संस्थानों से प्राप्त पूर्व चेतावनियों के आधार पर राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से प्रदेश की स्थिति पर **24×7 निगरानी** रखी जा रही है और सभी जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि संभावित फ्लैश फ्लड, जलभराव, भूस्खलन और नदी-नालों में अचानक जलस्तर बढ़ने की परिस्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के साथ ही किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करने के लिए संबंधित एजेंसियों को तैयार रखा गया है।

यात्रियों और पर्यटकों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील

आपदा प्रबंधन सचिव ने प्रदेशवासियों, चारधाम यात्रियों, कांवड़ यात्रियों और पर्यटकों से खराब मौसम तथा लगातार बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। उन्होंने नदी, नालों, गदेरों और बरसाती जलधाराओं के नजदीक नहीं जाने की सलाह दी है।

उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में छोटी जलधाराओं में भी अचानक तेज जलप्रवाह आ सकता है। ऐसे में पुल-पुलियों, नदी किनारे और जलभराव वाले रास्तों को पार करने का जोखिम न उठाएं। भूस्खलन संभावित मार्गों पर विशेष सावधानी बरतने और यात्रा से पहले मौसम तथा सड़क की स्थिति की जानकारी लेने की भी अपील की गई है।

चारधाम और कांवड़ यात्रा पर भी नजर

भारी बारिश और फ्लैश फ्लड के खतरे के बीच चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा को लेकर भी प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए जिलों को आपात स्थिति में यात्रियों के ठहरने, भोजन और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

जरूरत पड़ने पर यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोकने और मौसम सामान्य होने के बाद ही उन्हें आगे भेजने की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

बादल फटने का पूर्वानुमान नहीं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह तैयार

आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक फिलहाल मौसम विभाग ने बादल फटने जैसी किसी विशेष घटना का पूर्वानुमान नहीं दिया है। हालांकि, कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में नुकसान की आशंका बढ़ जाती है।

ऐसे में प्रशासन का फोकस केवल बारिश पर नहीं, बल्कि उन सभी संवेदनशील क्षेत्रों पर है जहां तेज बारिश के बाद हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं।

सड़क, भूस्खलन, नदी-नालों के जलस्तर, चारधाम और कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा तथा राहत-बचाव व्यवस्था को लेकर जिलों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए संसाधनों और राहत-बचाव व्यवस्थाओं को तैयार रखा गया है।