विशेष रिपोर्ट: केदारनाथ में देवस्थानम बोर्ड और BKTC विवाद पर घमासान। पुरोहितों और नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप

केदारनाथ में देवस्थानम बोर्ड और BKTC विवाद पर घमासान। पुरोहितों और नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप

देहरादून। केदारनाथ धाम से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने उत्तराखंड की राजनीति और धार्मिक हलकों में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है।

एक ओर केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों ने देवस्थानम बोर्ड की किसी भी संभावित वापसी का कड़ा विरोध करते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

वहीं दूसरी ओर बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) में वित्तीय अनियमितताओं और नियुक्तियों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

केदारनाथ धाम के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड के गठन के दौरान सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और तीर्थ पुरोहितों के अधिकारों की अनदेखी की गई थी।

उनका आरोप है कि तत्कालीन सरकार ने बिना संवाद किए बोर्ड का गठन किया, जिससे तीर्थ पुरोहितों का मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न हुआ। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि भविष्य में देवस्थानम बोर्ड जैसी व्यवस्था दोबारा लागू करने का प्रयास हुआ तो गांव-गांव से आंदोलन शुरू किया जाएगा, जो विधानसभा तक पहुंचेगा।

इधर, केदारनाथ धाम में वीआईपी मेहमानों के आवास और भोजन पर मंदिर समिति के कोष से खर्च किए जाने के आरोपों की जांच में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद मामला और गर्मा गया है।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि जांच रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन ने प्रथम दृष्टया वित्तीय नियमों के उल्लंघन को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

यह मामला तब चर्चा में आया था, जब आरटीआई के जरिए सामने आए दस्तावेजों में कुछ वीआईपी व्यक्तियों के भोजन और आवास का खर्च मंदिर समिति के खाते से वहन किए जाने का दावा किया गया था।

जांच में भुगतान प्रक्रिया में वित्तीय नियमों के पालन में अनियमितताएं सामने आने के बाद अब दोषियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

इसी बीच बीकेटीसी में नियुक्तियों को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष और वर्तमान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि चढ़ावा चोरी प्रकरण में निलंबित कर्मचारी की स्थायी नियुक्ति उनके कार्यकाल में हुई थी, इसलिए उन्हें इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए माफी मांगनी चाहिए।

वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में सभी नियुक्तियां निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की गई थीं।

उन्होंने भाजपा के आरोपों को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि किसी कर्मचारी के वर्षों बाद आरोपित होने के लिए नियुक्ति करने वाले व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

इन घटनाक्रमों के बाद केदारनाथ धाम से जुड़े धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। अब सभी की नजर शासन की आगामी कार्रवाई और देवस्थानम बोर्ड को लेकर भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर टिकी हुई है।