बड़ी खबर: CBI ने खोली 800 करोड़ के LUCC घोटाले की परतें। 29 संपत्तियां कुर्क, 18 आरोपी चार्जशीटेड

CBI ने खोली 800 करोड़ के LUCC घोटाले की परतें। 29 संपत्तियां कुर्क, 18 आरोपी चार्जशीटेड

देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) चिटफंड घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 आरोपियों और एक संस्था के खिलाफ देहरादून स्थित विशेष बीयूडीएस (BUDS) कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है।

सीबीआई ने आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC), भारतीय न्याय संहिता (BNS), उत्तराखंड जमाकर्ताओं के हित संरक्षण अधिनियम तथा अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम-2019 के तहत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।

पोंजी स्कीम से 800 करोड़ जुटाने का आरोप

सीबीआई के अनुसार, उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष 2025 में राज्य के विभिन्न थानों में दर्ज LUCC घोटाले से संबंधित 18 एफआईआर की जांच एजेंसी को सौंपी गई थी। 26 नवंबर 2025 को मामला दर्ज कर जांच शुरू हुई।

जांच में सामने आया कि वर्ष 2012 में गठित LUCC सोसायटी का प्रबंधन 2016 में समीर अग्रवाल ने अपने हाथ में लिया और नई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स बनाकर उत्तराखंड में 50 से अधिक शाखाओं के जरिए कथित अवैध निवेश योजनाएं संचालित कीं।

जांच में यह भी पाया गया कि संस्था का कोई वास्तविक कारोबार नहीं था। पुराने निवेशकों को भुगतान नए निवेशकों से जुटाए गए पैसे से किया जाता था, जिसे सीबीआई ने पोंजी स्कीम बताया है।

एजेंसी के मुताबिक करीब एक लाख निवेशकों से 800 करोड़ रुपये जुटाए गए, जबकि 400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान नहीं किया गया।

मुख्य आरोपी विदेश फरार

सीबीआई का आरोप है कि मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। उसने शेल कंपनियों के माध्यम से निवेशकों की रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कराया।

जांच में यह भी सामने आया कि समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल विदेश फरार हैं। दोनों के खिलाफ नोटिस और लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया जा चुका है।

शेल कंपनियों के जरिए धन का ट्रांसफर

जांच के मुताबिक, शादाब हुसैन, उत्तम कुमार सिंह राजपूत और दिनेश सिंह संस्था के प्रमुख पदाधिकारी थे। वहीं चेस्ट मैनेजर तरुण कुमार मौर्य, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला और ममता भंडारी ने विभिन्न शाखाओं से जमा नकदी को बैंकिंग सिस्टम से बचते हुए अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने का काम किया।

इसके अलावा, सुशील कुमार गोखरू ने किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन के साथ मिलकर मुंबई में 10 शेल फर्मों के बैंक खाते खुलवाए।

जांच में आरोप है कि उत्तराखंड के निवेशकों से जुटाई गई रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर कर सैकड़ों बैंक खातों के जरिए लेयरिंग कर इधर-उधर भेजी गई।

39 संपत्तियां चिन्हित, 29 कुर्क

सीबीआई ने जांच के दौरान उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में आरोपियों की 39 संपत्तियों की पहचान की है। इनमें से 29 संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया जा चुका है, जबकि शेष 10 संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया जारी है।

सात आरोपी न्यायिक हिरासत में

सीबीआई अब तक इस मामले में तरुण कुमार मौर्य, ममता भंडारी, गौरव उर्फ गौरव रोहिल्ला, राजेंद्र सिंह बिष्ट, सुशील कुमार गोखरू, किशनलाल उदयलाल जैन और पंकज कुशल सिंह जैन को गिरफ्तार कर चुकी है।

सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसी का कहना है कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।