हाईकोर्ट के दो अहम फैसलें। संविदा शिक्षकों को संरक्षण, कब्रिस्तान मामले में DM को कार्रवाई का आदेश
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण आदेश जारी किए। एक ओर राज्य के विश्वविद्यालयों में कार्यरत संविदा सहायक प्रोफेसरों को अंतरिम राहत देते हुए सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को उन्हें किसी अन्य संविदा शिक्षक से प्रतिस्थापित नहीं करने का निर्देश दिया।
वहीं दूसरी ओर देहरादून के मोरोवाला कब्रिस्तान विवाद में जिलाधिकारी को कब्रिस्तान पर लगाए गए प्रतिबंधात्मक बोर्ड को तत्काल हटाने और पूरे मामले में विधि के अनुसार निर्णय लेने के आदेश दिए।
पहले मामले में मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने डॉ. अंजली सिंह सहित 12 संविदा सहायक प्रोफेसरों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई प्रतिकूल आधार नहीं है, उन्हें उनके पदों से न हटाया जाए और किसी अन्य संविदा शिक्षक से प्रतिस्थापित न किया जाए।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे स्वीकृत पदों पर कार्यरत हैं, लेकिन विश्वविद्यालय ने नए अनुबंध शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिया, जबकि संविदा कर्मचारियों को दूसरे संविदा कर्मचारियों से बदलना स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत है।
अदालत ने राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
दूसरे मामले में वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने देहरादून के क्लेमेंटाउन स्थित मोरोवाला कब्रिस्तान में बाहरी लोगों के शव दफनाने पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर दायर याचिका का निस्तारण करते हुए जिलाधिकारी देहरादून को निर्देश दिए कि कब्रिस्तान में कमेटी द्वारा लगाया गया बोर्ड तत्काल हटाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि शवों को दफनाने से क्यों रोका जा रहा है। अदालत ने पूरे मामले में कानून के अनुसार निर्णय लेने को कहा।
याचिकाकर्ता अख्तर हुसैन का कहना था कि वह लंबे समय से क्षेत्र में रह रहे हैं और उनके पूर्वज भी इसी कब्रिस्तान में दफन हैं।
इसके बावजूद स्थानीय कमेटी ने बोर्ड लगाकर बाहरी लोगों के शव दफनाने पर रोक लगा दी, जो संविधान प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब जिला प्रशासन पूरे मामले की जांच कर कानून के अनुरूप कार्रवाई करेगा।

