चुनाव आयोग, EVM और केंद्रीय एजेंसियों पर विपक्ष का हमला, सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विरोध में खड़े 23 विपक्षी दलों ने देश की चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं जताते हुए सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों को एक संयुक्त पत्र भेजा है।
यह पत्र मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के माध्यम से भेजा गया, जिसमें चुनाव आयोग की निष्पक्षता, केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर सवाल उठाए गए हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि हाल के वर्षों में कई चुनावों के नतीजे जनता की वास्तविक इच्छा को प्रतिबिंबित नहीं करते और चुनावी प्रक्रिया में लगातार हस्तक्षेप किया जा रहा है। पत्र पर कांग्रेस, द्रमुक, समाजवादी पार्टी, राजद, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार), आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, माकपा, भाकपा, भाकपा (माले), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, फॉरवर्ड ब्लॉक सहित 23 दलों के हस्ताक्षर हैं।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का उपयोग विपक्षी दलों को निशाना बनाने, चुनावी नतीजों को प्रभावित करने और निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने के लिए किया जा रहा है।
विपक्ष ने चुनाव आयोग की नियुक्तियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2014 के बाद आयोग में हुई नियुक्तियां संदेह के घेरे में रही हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव से पहले चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को भी विपक्ष ने अनावश्यक बताया और आरोप लगाया कि इससे मतदाता सूची प्रभावित हो सकती है।
पत्र में कहा गया कि दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र के हालिया विधानसभा चुनावों में भी अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। विपक्ष का दावा है कि चुनाव आयोग में ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है, जो सरकार के अनुरूप कार्य करते हैं।
विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट के अनूप बरनवाल फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बाद में बनाए गए कानून के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर कर दिया गया, जबकि इस कानून की संवैधानिक वैधता अभी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के अधीन है।
पत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन और भाजपा नेताओं के कथित सांप्रदायिक बयानों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उल्लेख करते हुए विपक्ष ने कहा कि आयोग ने बांग्लादेशी घुसपैठियों का हवाला दिया, लेकिन इसके समर्थन में कोई सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया।
पत्र में कहा गया कि जब अन्य लोकतांत्रिक संस्थाएं विफल हो जाती हैं, तब जनता न्यायपालिका से निष्पक्ष हस्तक्षेप की उम्मीद करती है।
विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि वर्ष 2027 में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान पर फिलहाल रोक लगाने पर विचार किया जाए और ऐसी प्रक्रिया चुनाव से काफी पहले पूरी कराई जाए।
इसके अलावा विपक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के माध्यम से मतदान को लेकर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जहां संभव हो, वहां मतपत्र आधारित मतदान प्रणाली को फिर से अपनाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

