कर्णप्रयाग विवाद से बढ़ा तनाव। पंजाब से हरिद्वार पहुंचा सिख प्रतिनिधिमंडल, नगरासू गुरुद्वारे में गतिरोध जारी
देहरादून/हरिद्वार/रुद्रप्रयाग। चमोली जिले के कर्णप्रयाग में निहंग सिख श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच हुई झड़प के बाद उत्तराखंड में हालात संवेदनशील बने हुए हैं।
एक ओर गिरफ्तार निहंग सिखों के समर्थन में पंजाब से सांसदों, विधायकों और सिख संगठनों का प्रतिनिधिमंडल हरिद्वार पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में कुछ निहंग सिखों के डटे रहने से प्रशासन की चुनौतियां बढ़ गई हैं।
पंजाब से पहुंचे प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि 16 जून को कर्णप्रयाग में पार्किंग को लेकर हुए विवाद में दोनों पक्ष शामिल थे, लेकिन पुलिस कार्रवाई केवल निहंग सिखों के खिलाफ की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि गिरफ्तार युवकों को अदालत में पेश करने के दौरान उनके धार्मिक सम्मान और भावनाओं का ध्यान नहीं रखा गया, जिससे सिख समुदाय में नाराजगी है।
पंजाब के सांसद सरबजीत सिंह खालसा ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करेगा।
उनका दावा है कि संबंधित युवकों ने हमला नहीं किया, बल्कि आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि घटना की परिस्थितियों, दोनों पक्षों की भूमिका और चोटों के कारणों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
वहीं, विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विरोध-प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आने वाले सिख श्रद्धालुओं, पर्यटकों और संगत को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए।
हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल की वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कराने की व्यवस्था की गई है और प्रशासन संवाद के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है।
आखिर निहंग कौन होते हैं?
निहंग सिख, सिख धर्म की एक पारंपरिक योद्धा परंपरा से जुड़े होते हैं। इनकी स्थापना का श्रेय दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह को दिया जाता है। निहंग अपनी विशिष्ट नीली पोशाक, ऊंची पगड़ी, पारंपरिक शस्त्र धारण करने की परंपरा और धार्मिक अनुशासन के लिए पहचाने जाते हैं।
इतिहास में निहंगों की भूमिका सिख धर्मस्थलों और समुदाय की रक्षा करने वाले योद्धाओं के रूप में रही है। आज भी वे विभिन्न धार्मिक आयोजनों, विशेषकर गुरुद्वारों और सिख यात्राओं में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनके लिए पारंपरिक शस्त्र केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा माने जाते हैं।
सिख संगठनों का आरोप, निहंगों के साथ क्या हुआ?
सिख प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि कर्णप्रयाग की घटना के बाद निहंग सिखों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था, तो जांच और कार्रवाई भी संतुलित होनी चाहिए थी।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया है कि गिरफ्तार निहंग युवकों को अदालत में पेश करने के दौरान उनके धार्मिक स्वरूप और सम्मान का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस और प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उत्तराखंड सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले को किसी भी तरह से धार्मिक विवाद का रूप नहीं दिया जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि शुरुआती जांच में यह मामला दो पक्षों के बीच हुए विवाद और भावनात्मक प्रतिक्रिया का प्रतीत होता है।
नगरासू गुरुद्वारे में क्यों बना हुआ है गतिरोध?
कर्णप्रयाग विवाद के बाद रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में कुछ निहंग सिखों के डटे रहने से तनाव की स्थिति बनी हुई है। गुरुद्वारा प्रबंधन का आरोप है कि छत पर मौजूद लोग किसी मान्यता प्राप्त समिति या पंजीकृत संगठन से जुड़े नहीं हैं।
गुरुद्वारा संचालक बेहंत सिंह ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने गुरुद्वारे के सोलर सिस्टम में तोड़फोड़ की, पानी की आपूर्ति बाधित की और एक बुजुर्ग श्रद्धालु को अपने साथ रोके रखा। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।
प्रशासन के अनुसार, गुरुद्वारे की छत पर मौजूद लोग कर्णप्रयाग मामले में गिरफ्तार तीन निहंग सिखों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस और प्रशासन लगातार वार्ता के जरिए समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक गतिरोध समाप्त नहीं हुआ है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक स्वयं मौके पर मौजूद हैं। स्थानीय पुलिस के साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल की टीम भी तैनात की गई है और गुरुद्वारे के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।
सरकार ने क्या कहा?
उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि राज्य सभी धर्मों और आस्थाओं का सम्मान करता है और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार ने गढ़वाल मंडल के पुलिस महानिरीक्षक को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं, जबकि कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।
कर्णप्रयाग क्षेत्र में एहतियातन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी गई है, जो 27 जून तक प्रभावी रहेगी। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता चारधाम यात्रा के दौरान शांति और सौहार्द बनाए रखना है। वहीं, सिख संगठनों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोनों पक्षों की भूमिका की पड़ताल की जाए और किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।


