बिग ब्रेकिंग: उपनल कर्मियों के मुद्दे पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- आदेशों का पालन अब तक क्यों नहीं?

उपनल कर्मियों के मुद्दे पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- आदेशों का पालन अब तक क्यों नहीं?

नैनीताल। उत्तराखंड में वर्षों से नियमितीकरण और समान कार्य के बदले समान वेतन की मांग कर रहे उपनल कर्मचारियों के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।

कोर्ट ने सरकार द्वारा तैयार किए गए नए अनुबंध पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्पष्ट कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है। खंडपीठ ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि समय पर संतोषजनक जवाब दाखिल नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम करने की कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष उपनल संविदा कर्मचारियों की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद सरकार ने उपनल कर्मचारियों को नियमित नहीं किया और न ही उन्हें निर्धारित वेतनमान का पूरा लाभ दिया गया। कर्मचारियों ने वेतन से जीएसटी कटौती और नए अनुबंध की शर्तों को भी कोर्ट के आदेशों के विपरीत बताया।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को कैबिनेट के समक्ष रखा गया है और इस पर निर्णय लेने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।

इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि जब पूर्व आदेश स्पष्ट हैं तो उनका पालन अब तक क्यों नहीं किया गया? अदालत ने कहा कि आखिर क्यों न संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने विशेष रूप से उस नए अनुबंध पर आपत्ति जताई, जिसे सरकार उपनल कर्मचारियों से भरवाना चाहती है। न्यायालय ने पूछा कि जब समान कार्य के बदले समान वेतन और जीएसटी कटौती रोकने को लेकर पहले ही आदेश जारी हैं, तो नए अनुबंध की जरूरत क्यों पड़ी?

कर्मचारियों का आरोप है कि इस अनुबंध में भविष्य में नियमितीकरण की मांग नहीं करने जैसी शर्तें जोड़ी गई हैं, जो उनके अधिकारों को सीमित करती हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उपनल कर्मी लंबे समय से विभिन्न सरकारी विभागों में स्थायी प्रकृति के कार्य कर रहे हैं।

ये कर्मचारी सैनिक कल्याण विभाग के माध्यम से आउटसोर्स व्यवस्था में नियुक्त किए गए हैं, जबकि जिन पदों पर वे कार्यरत हैं, वे नियमित भर्ती के दायरे में आते हैं।

साल 2018 में हाईकोर्ट ने उपनल कर्मचारियों के पक्ष में फैसला देते हुए नियमितीकरण और समान वेतन देने के निर्देश दिए थे, लेकिन राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी थी।

हाल ही में राज्य सरकार ने उपनल कर्मचारियों के लिए समान वेतन व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए, लेकिन इसके साथ लाए गए नए अनुबंध ने विवाद को और बढ़ा दिया।

कर्मचारियों का कहना है कि अनुबंध में मेडिकल सुविधा, सामाजिक सुरक्षा, बोनस और अन्य सेवा लाभों को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं। इससे कर्मचारियों में अस्थायी स्थिति में ही लंबे समय तक काम करने की आशंका बढ़ गई है।

इसी बीच कार्मिक विभाग द्वारा जारी नए आदेश में कहा गया है कि जिन पदों पर उपनल कर्मी कार्यरत हैं और जो सीधी भर्ती के दायरे में आते हैं, उन पर अधियाचन भेजने से पहले कार्मिक, वित्त और न्याय विभाग की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी।

इस आदेश ने उपनल कर्मचारियों के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब मामले की अगली सुनवाई आगामी मंगलवार को होगी, जहां राज्य सरकार को कोर्ट के सवालों का विस्तृत जवाब देना होगा।