दिल्ली हाईकोर्ट के पर्सनैलिटी राइट, आबकारी केस, AI विवाद, जांच प्रक्रिया और जमानत पर बड़े फैसले। पढ़ें….
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने हालिया सुनवाइयों में कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई करते हुए न्यायिक प्रक्रिया, व्यक्तिगत अधिकारों, मीडिया की भूमिका और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर अहम टिप्पणियां की हैं। अलग-अलग मामलों में अदालत के रुख ने कई कानूनी सिद्धांतों को स्पष्ट किया है।
पर्सनैलिटी राइट पर सख्त टिप्पणी
जस्टिस तुषार राव गेडेला ने क्लैट 2026 टॉपर विवाद से जुड़े मामले में कहा कि हर सफलता या उपलब्धि को पर्सनैलिटी राइट का दर्जा नहीं दिया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसा किया गया तो हर परीक्षा में टॉप करने वाला व्यक्ति इस अधिकार का दावा करने लगेगा, जो अव्यावहारिक स्थिति पैदा करेगा।
हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले व्यक्तियों के मामलों में यह प्रश्न अलग तरीके से परखा जा सकता है।
अदालत ने संबंधित टॉपर को अपमानजनक सामग्री से संरक्षण दिया, लेकिन इसे पर्सनैलिटी राइट के आधार पर नहीं माना।
आबकारी नीति मामले में एमिक्स क्यूरी नियुक्ति
जस्टिस स्वराणा कांता शर्मा की पीठ ने आबकारी नीति मामले में सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की अनुपस्थिति पर सख्त रुख अपनाया।
अदालत ने कहा कि इनकी ओर से तीन वरिष्ठ वकीलों को एमिक्स क्यूरी नियुक्त किया जाएगा, जिनके माध्यम से ही केंद्रीय जांच ब्यूरो की दलीलें सुनी जाएंगी।
यह मामला 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति से जुड़ा है, जिसमें अनियमितताओं के आरोपों के बाद जांच शुरू हुई थी। ट्रायल कोर्ट पहले ही सभी आरोपियों को बरी कर चुका है, जिसके खिलाफ CBI ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
AI+ स्मार्टफोन विवाद में अपमानजनक कंटेंट पर रोक
जस्टिस तुषार राव गेडेला ने NxtQuantum Shift Technologies India और उसके संस्थापक माधव शेठ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कुछ यूट्यूबर्स को कंपनी के खिलाफ अपमानजनक और भ्रामक सामग्री प्रकाशित करने से रोक दिया।
अदालत ने कहा कि बिना ठोस तकनीकी आधार के लगाए गए आरोप कंपनी की साख को नुकसान पहुंचा सकते हैं और यह आलोचना की सीमा से आगे जाकर दुष्प्रचार की श्रेणी में आता है।
इंजीनियर राशिद को पिता से मिलने की अनुमति
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने इंजीनियर राशिद को राहत देते हुए उन्हें 10 मई तक रोजाना AIIMS दिल्ली में भर्ती अपने बीमार पिता से मिलने की अनुमति दी।
अदालत ने निर्देश दिया कि उन्हें पुलिस अभिरक्षा में अस्पताल ले जाया जाएगा और तय समय के बाद वापस जेल लाया जाएगा। राशिद गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामले में 2019 से जेल में बंद हैं।
बिना तारीख वाले नोटिस पर कड़ी आपत्ति
जस्टिस गिरीश कथपालिया ने जांच अधिकारी द्वारा जारी बिना तारीख वाले नोटिस को “चौंकाने वाली चूक” बताया।
अदालत ने कहा कि इस तरह के नोटिस का दुरुपयोग कर आरोपी पर जांच में सहयोग न करने का आरोप लगाया जा सकता है।
कोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को कार्रवाई कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और याचिकाकर्ताओं को अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी से संरक्षण दिया।
नकली कैंसर दवा मामले में जमानत और मीडिया पर टिप्पणी
मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े नकली कैंसर दवा रैकेट मामले में हाईकोर्ट ने पांच आरोपियों को जमानत देते हुए प्रवर्तन निदेशालय की जांच पर सवाल उठाए।
अदालत ने कहा कि आरोपियों के बयान “कॉपी-पेस्ट” जैसे प्रतीत होते हैं और हिरासत में दिए गए बयानों की विश्वसनीयता संदिग्ध है।
साथ ही कोर्ट ने The Indian Express में प्रकाशित रिपोर्टों पर भी कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि यदि इस तरह की रिपोर्टिंग न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के उद्देश्य से की गई है तो यह कानून के शासन पर गंभीर हमला है।
JEE Advanced 2026: छात्र को अंतरिम राहत
जस्टिस जस्मीत सिंह ने एक छात्र को अंतरिम राहत देते हुए JEE Advanced 2026 परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी।
मामला IIT सीट आवंटन के बाद पात्रता को लेकर था। अदालत ने कहा कि यदि छात्र को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई तो उसकी याचिका निरर्थक हो जाएगी। हालांकि परिणाम अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

