उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, 12 विधेयक और 4 अध्यादेश पास
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। 9 मार्च से शुरू हुए इस सत्र में वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट पारित किया गया और कुल 12 विधेयकों के साथ 4 अध्यादेशों को भी मंजूरी दी गई।
विधानसभा सचिवालय के अनुसार सत्र के दौरान 5 दिनों में कुल 41 घंटे 10 मिनट तक सदन की कार्यवाही चली। इस दौरान विधायकों की ओर से 50 अल्पसूचित प्रश्न और 545 तारांकित प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें से 291 प्रश्नों के उत्तर सदन में दिए गए।
सत्र के दौरान विनियोग विधेयक समेत कुल 12 विधेयकों को पारित किया गया, जबकि चार अध्यादेशों को भी मंजूरी दी गई।
बजट सत्र की मुख्य बातें
- 4 अध्यादेश और 12 विधेयक पारित
- 5 दिनों में 41 घंटे 10 मिनट चली कार्यवाही
- 545 तारांकित और 50 अल्पसूचित प्रश्न आए
- 291 प्रश्नों के उत्तर दिए गए
सदन में मंजूर हुए प्रमुख अध्यादेश
- उत्तराखंड दुकान और स्थापना (रोजगार विनिमय और सेवा शर्त) संशोधन अध्यादेश, 2025
- उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश, 2025
- उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2025
- उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026
पारित हुए प्रमुख विधेयक
- उत्तराखंड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा-शर्त) (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026
- समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड भाषा संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड देवभूमि परिवार विधेयक, 2026
- उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026
- उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक, 2026
- आरक्षण से जुड़े 1993 अधिनियम में संशोधन विधेयक
विपक्ष का सरकार पर हमला
सत्र की समाप्ति के बाद नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि विपक्ष ने बजट सत्र में अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सत्र को समय से पहले खत्म करना चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने प्रश्नकाल और विभिन्न नियमों के तहत सरकार को घेरने का काम किया।
यशपाल आर्य ने कहा कि सरकार का बजट “झूठ का पुलिंदा” है और इसमें ऐसा कुछ नहीं है जिसकी सराहना की जा सके। वहीं कांग्रेस विधायक मनोज तिवारी और हरीश धामी ने भी आरोप लगाया कि विभागीय प्रश्नों पर मंत्रियों के पास संतोषजनक जवाब नहीं थे और कई बार अधिकारी गलत आंकड़े पेश करते दिखे।
भाजपा ने सत्र को बताया सफल
भाजपा विधायक विनोद कंडारी ने बजट सत्र को सफल बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरे सत्र के दौरान केवल विरोध की राजनीति करती नजर आई। उनके मुताबिक कांग्रेस ने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में भाग नहीं लिया और बाद में सत्र की अवधि बढ़ाने की बात कहती रही, जो महज राजनीतिक बयानबाजी है।



