भर्ती परीक्षा में उत्तर पुस्तिका देखने का अधिकार, UKPSC का ‘नोट-4’ प्रावधान असंवैधानिक
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) की भर्ती परीक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए पारदर्शिता के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने कहा कि उम्मीदवारों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण अंतिम परिणाम के बाद ही करने की बाध्यता न्यायसंगत नहीं है और इससे अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होते हैं।
अतिरिक्त निजी सचिव भर्ती परीक्षा से जुड़ा मामला
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने अतिरिक्त निजी सचिव (APS) पद की भर्ती के लिए आयोजित शॉर्टहैंड परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
अदालत ने असफल घोषित उम्मीदवारों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण करने और उनकी प्रतियां प्राप्त करने का अधिकार दिया है।
असफल अभ्यर्थी पहुंचे थे हाईकोर्ट
राजवीर सिंह, रणवीर सिंह तोमर, रुचि राणा सहित अन्य अभ्यर्थियों ने 3 फरवरी 2026 को घोषित शॉर्टहैंड परीक्षा के परिणाम को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने उन्हें उनकी शॉर्टहैंड नोटबुक और टाइप की गई उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं दी, जिससे मूल्यांकन की शुद्धता की जांच संभव नहीं हो सकी।
भर्ती प्रक्रिया का विवरण
देहरादून स्थित सचिवालय और हरिद्वार स्थित उत्तराखंड लोक सेवा आयोग में अतिरिक्त निजी सचिव के 99 पदों पर भर्ती के लिए 18 जुलाई 2024 को विज्ञापन जारी किया गया था।
चयन प्रक्रिया के पहले चरण में हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग, कंप्यूटर ज्ञान और शॉर्टहैंड जैसे कौशल परीक्षण शामिल थे। इन परीक्षाओं में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को ही दूसरे चरण की लिखित परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलना था।
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के पहले चरण की अन्य परीक्षाएं सफलतापूर्वक पास कर ली थीं और शॉर्टहैंड परीक्षा में भी अच्छा प्रदर्शन किया था।
इसके बावजूद परिणाम में उन्हें असफल घोषित कर दिया गया। उन्होंने आशंका जताई कि मूल्यांकन में त्रुटि हो सकती है, इसलिए उत्तर पुस्तिकाओं के निरीक्षण की अनुमति दी जाए।
आयोग का ‘नोट-4’ बना विवाद की वजह
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा जारी ‘नोट-4’ के अनुसार, उम्मीदवारों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण केवल अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही करने की अनुमति दी जा सकती थी।
अदालत ने इस प्रावधान को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि निरीक्षण में अत्यधिक देरी होने से संभावित त्रुटियों को सुधारना लगभग असंभव हो जाता है और इससे अभ्यर्थियों को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना की श्रेणी में आती है। इसलिए उम्मीदवार को उसका निरीक्षण करने और उसकी प्रति प्राप्त करने का अधिकार है।
कोर्ट का निर्देश
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि आयोग का ‘नोट-4’ उस सीमा तक निरस्त माना जाएगा, जहां तक वह असफल उम्मीदवारों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण करने से रोकता है।
साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं को अपनी शॉर्टहैंड नोटबुक और उत्तर पुस्तिकाओं का निरीक्षण करने तथा उनकी प्रतियां प्राप्त करने की अनुमति दी जाए।



