बिग ब्रेकिंग:बीमित गाड़ियों से फर्जी MACT दावे! सुप्रीम कोर्ट ने पकड़ा ‘मुआवजा रैकेट’

बीमित गाड़ियों से फर्जी MACT दावे! सुप्रीम कोर्ट ने पकड़ा ‘मुआवजा रैकेट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी मोटर दुर्घटना मुआवजा (MACT) दावों के एक कथित “व्यापक रैकेट” पर गंभीर चिंता जताते हुए सख्त रुख अपनाया है। अदालत के समक्ष आरोप है कि बीमित (इंश्योर्ड) वाहनों को योजनाबद्ध तरीके से दुर्घटनाओं में “प्लांट” कर बीमा कंपनियों से मोटी रकम वसूली जा रही है।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ Oriental Insurance Company Limited की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

कंपनी ने उड़ीसा हाईकोर्ट के मुआवजा आदेश को चुनौती देते हुए दावा किया कि एक ही वाहन को पहले भी चार अलग-अलग दुर्घटना मामलों में आरोपी वाहन के रूप में दिखाया गया है।

जांच में चौंकाने वाले संकेत

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर राज्य प्राधिकारियों ने तथ्य-खोज जांच की। अनुपालन रिपोर्ट में सामने आया कि संबंधित वाहन चार अन्य दावों में भी शामिल रहा है। हालांकि मौजूदा मामले में वाहन की वास्तविक संलिप्तता पाई गई, लेकिन बार-बार एक ही वाहन का सामने आना गंभीर संदेह पैदा करता है।

ओडिशा के महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जांच में “सभी हितधारकों की संलिप्तता” वाले एक व्यापक रैकेट के संकेत मिले हैं। कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और आगे हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता जताई गई है।

देशव्यापी असर के संकेत

खंडपीठ ने कहा कि यह पैटर्न केवल ओडिशा तक सीमित नहीं हो सकता। अदालत ने देशभर की सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों वाहन, मेडिकल, जीवन, फसल, अग्नि और समुद्री बीमा की सूची मांगी है, जिससे संकेत मिलता है कि मामला व्यापक प्रणालीगत जांच की ओर बढ़ सकता है।

मामले को 18 मार्च 2026 को “For Direction” के तहत सूचीबद्ध किया गया है। संभावना है कि सुप्रीम कोर्ट इस पर सख्त दिशानिर्देश या व्यापक आदेश जारी करे।

अदालत की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील की सराहना की, जिन्होंने इस गंभीर मुद्दे को न्यायालय के समक्ष उठाया। साथ ही ओडिशा के महाधिवक्ता की भी प्रशंसा की गई, जिन्होंने जांच को गंभीरता से आगे बढ़ाया।

यह मामला देशभर में फर्जी बीमा दावों के खिलाफ कड़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।