उत्तराखंड में 6 नेशनल हाईवे सहित 66 सड़कें बाधित, घंटों जाम में फंसें स्थानीय और पर्यटक
देहरादून। उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी के बाद राज्य आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने शनिवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से प्रदेश में वर्षा, बर्फबारी और कोहरे के चलते उत्पन्न हालात की समीक्षा की और सभी अधिकारियों को 24×7 सतर्क रहने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और नियमित अपडेट ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जन सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए सभी व्यवस्थाएं शीघ्र सुचारू की जाएं।
प्रदेश में 66 सड़कें बंद, 6 नेशनल हाईवे बाधित
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार 24 जनवरी की शाम तक प्रदेशभर में कुल 66 सड़कें बर्फबारी के कारण बंद हैं।
- 6 नेशनल हाईवे
- 6 स्टेट हाईवे
- 3 एमडीआर
- 1 बीडीआर
- 24 पीडब्ल्यूडी सड़कें
- 26 ग्रामीण सड़कें शामिल हैं।
सचिव आपदा प्रबंधन ने निर्देश दिए कि बर्फ हटाने की मशीनरी और संसाधन पूरी तरह सक्रिय रखें जाएं और बंद मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर खोला जाए।
बिजली-पेयजल बहाली के निर्देश
विनोद कुमार सुमन ने बिजली और पेयजल आपूर्ति की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि फील्ड में टीमें तैनात रखी जाएं, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो। साथ ही यदि कहीं वाहन या व्यक्ति फंसे होने की सूचना मिलती है, तो तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जाए।
एवलांच की चेतावनी, चमोली में ज्यादा खतरा
रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE), चंडीगढ़ द्वारा हिमस्खलन (एवलांच) की चेतावनी जारी की गई है, जो 24 जनवरी 2026 शाम 5 बजे से 25 जनवरी शाम 5 बजे तक प्रभावी रहेगी।
DGRE बुलेटिन के अनुसार
- उत्तरकाशी: 2800 मीटर से अधिक ऊंचाई पर खतरा स्तर-2 (येलो)
- चमोली: 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर खतरा स्तर-3 (ऑरेंज)
- रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर: 2800 मीटर से अधिक ऊंचाई पर खतरा स्तर-2 (येलो)
DGRE ने चेतावनी दी है कि चमोली के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मध्यम आकार के हिमस्खलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
जिला प्रशासन को विशेष सतर्कता के निर्देश
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी संबंधित जिलों को अलर्ट पर रखते हुए निर्देश दिए हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही पर नियंत्रण रखा जाए। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सतर्क किया जाए और राहत-बचाव दलों को तैयार अवस्था में रखा जाए।
मसूरी में बर्फबारी के बाद पर्यटकों की भीड़, जाम से लोग परेशान
दो वर्षों बाद मसूरी में हुई बर्फबारी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई। वीकेंड के चलते मसूरी, लाल टिब्बा, धनोल्टी, काणाताल, सुवाखोली और बुरांशखंडा की ओर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई।
मसूरी–देहरादून मार्ग पर सबसे ज्यादा दबाव
मसूरी–देहरादून मार्ग पर वैली ब्रिज, कोल्हूखेत, जेपी बैंड से लाइब्रेरी चौक तक करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा। कैंपटी रोड, लंढौर रोड, टिहरी बाईपास (NH-707A) और लाल टिब्बा मार्ग पर भी वाहन घंटों रेंगते रहे।
अतिरिक्त पुलिस भी नहीं संभाल सकी भीड़
जाम से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, लेकिन पर्यटकों की संख्या अधिक होने से यातायात सामान्य नहीं हो सका। कई सैलानी घंटों तक जाम में फंसे रहे और सोशल मीडिया पर नाराजगी भी जताई।
कारोबार को लाभ, लेकिन अव्यवस्था बनी चिंता
पर्यटकों की भारी आमद से होटल, टैक्सी, रेस्तरां और स्थानीय व्यवसायों को लाभ जरूर मिला, लेकिन यातायात अव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल भी खड़े हुए हैं।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने आम जनता और पर्यटकों से अपील की है कि,
- अनावश्यक यात्रा से बचें।
- प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।,
- फिसलन और जाम को देखते हुए सतर्क रहें।
- किसी भी आपात स्थिति में जिला प्रशासन या आपात सेवाओं से संपर्क करें।



