बिग ब्रेकिंग: किसान आत्महत्या मामला पहुंचा हाईकोर्ट, 26 नामजद आरोपियों को फिलहाल राहत नहीं

किसान आत्महत्या मामला पहुंचा हाईकोर्ट, 26 नामजद आरोपियों को फिलहाल राहत नहीं

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने काशीपुर निवासी किसान की आत्महत्या मामले में दर्ज मुकदमे को निरस्त करने और नामजद लोगों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने संबंधी याचिका पर सुनवाई की।

न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने फिलहाल याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं देते हुए राज्य सरकार से मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह कल तक स्थिति रिपोर्ट पेश करे। मामले की सुनवाई कल भी जारी रहेगी।

होटल में गोली मारकर की थी आत्महत्या

मामले के अनुसार, शनिवार देर रात हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र स्थित एक होटल में काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले सुखवंत सिंह ने फेसबुक लाइव के जरिए कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे।

पुलिस अधिकारियों पर भी लगाए थे आरोप

सुखवंत सिंह ने अपने लाइव वीडियो में ऊधम सिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा समेत अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए थे।

उन्होंने कहा था कि उनके साथ जमीन के सौदे में धोखाधड़ी हुई है और उनसे करीब चार करोड़ रुपये ठग लिए गए। आरोप था कि बार-बार शिकायत के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और उन्हें डराकर भगा दिया गया।

26 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

किसान की आत्महत्या के बाद पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर पर आईटीआई थाना, काशीपुर में 26 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया।

नामजद आरोपियों में अमरजीत सिंह, दिव्या, रविन्द्र कौर, लवप्रीत कौर, कुलविन्दर सिंह उर्फ जस्सी, हरदीप कौर, आशीष चौहान, गिरवर सिंह, महीपाल सिंह, शिवेन्द्र सिंह, विमल, विमल की पत्नी, देवेन्द्र, राजेन्द्र, गुरप्रेम सिंह, जगपाल सिंह, जगवीर राय, मनप्रीत कलसी, अमित, मोहित, सुखवंत सिंह पन्नू, वीरपाल सिंह पन्नू, बलवंत सिंह बक्सौरा, बिजेन्द्र, पूजा और जहीर शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा

आज हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि उनका इस मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है और उन्हें जमीन विवाद के चलते गलत तरीके से फंसाया गया है। याचिका में गिरफ्तारी पर रोक लगाने और दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की गई।

हाईकोर्ट का रुख

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी और राज्य सरकार से मामले की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अब इस मामले पर अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।