बिग ब्रेकिंग: कॉर्बेट पार्क में जिप्सी पंजीकरण विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, डायरेक्टर से मांगी गाइडलाइन की प्रति

कॉर्बेट पार्क में जिप्सी पंजीकरण विवाद पर हाईकोर्ट सख्त, डायरेक्टर से मांगी गाइडलाइन की प्रति

देहरादून। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में कॉर्बेट नैशनल पार्क में जिप्सी संचालन के नए पंजीकरण को लेकर दायर याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई हुई।

स्थानीय वाहन स्वामियों का आरोप है कि पार्क प्रशासन ने नई लिस्ट में कई वैध परमिट धारकों को शामिल नहीं किया, जिससे वे लॉटरी प्रक्रिया में भाग ही नहीं ले पा रहे हैं।

हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कॉर्बेट पार्क के डायरेक्टर को निर्देश दिया कि टाइगर कंजर्वेशन गाइडलाइन की प्रति न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।

अदालत का कहना है कि पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पारदर्शिता आवश्यक है।

अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने बताया कि मामले की अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होगी। उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस तरह के मामलों में कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन जरूरी है।

याचिकाकर्ताओं की दलील

स्थानीय निवासी चक्षु करगेती, सावित्री अग्रवाल समेत अन्य जिप्सी स्वामियों ने याचिका दायर कर कहा है कि,

जिप्सी परमिट धारकों के लिए बनाई गई लॉटरी प्रक्रिया में पुराने व नए दोनों परमिट धारकों को समान अवसर मिलना चाहिए। पार्क प्रशासन विशेष श्रेणी की जिप्सियों को ही पंजीकृत कर रहा है।

दो वर्ष पुराने पंजीकरण रखने वाले वाहन स्वामियों को प्रतिभाग करने से रोका जा रहा है, जबकि उनके पास पिछले वर्ष आरटीओ से वैध परमिट भी मिला है। यह कोर्ट के पूर्व आदेशों का उल्लंघन है और इससे कई जिप्सी स्वामी बेरोजगार हो गए हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि स्थानीय लोगों को रोजगार से वंचित करने का कोई औचित्य नहीं है, जबकि वे भी सभी मानक पूरे करते हैं।

सरकार का पक्ष

सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि,

  • सभी परमिट मानकों के अनुरूप ही जारी किए गए हैं।
  • जो वाहन या स्वामी निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते, उन्हें लिस्ट से बाहर किया गया है।

सरकार ने दावा किया कि प्रक्रिया पारदर्शी है और कोई भेदभाव नहीं किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

कॉर्बेट नैशनल पार्क में जिप्सी संचालन के लिए हर साल लॉटरी प्रक्रिया होती है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस बार पार्क प्रशासन ने कुछ विशेष श्रेणी को प्राथमिकता दी और कई वैध परमिट धारकों को लिस्ट में स्थान नहीं दिया।

इससे स्थानीय रोजगार प्रभावित हो रहा है और लोग कोर्ट की शरण में पहुंचे हैं। अगली सुनवाई में पार्क प्रबंधन को गाइडलाइन सहित सभी संबंधित दस्तावेज न्यायालय में पेश करने होंगे।