उत्तराखंड के विकास को मिलेगी नई रफ्तार! 7,844 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश, धामी ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां
देहरादून। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में मंगलवार को विधानसभा के तृतीय सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया।
किसानों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पेयजल, ऊर्जा, खेल, सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत ढांचे से जुड़ी योजनाओं के लिए इसमें अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया गया है।
अनुपूरक बजट के बाद राज्य का कुल बजट आकार बढ़कर 1,19,547.39 करोड़ रुपये हो जाएगा। वहीं, सदन की कार्यवाही के बाद मुख्यमंत्री ने प्रेस वार्ता में सरकार की विकास संबंधी उपलब्धियां गिनाते हुए वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्य बनाने का संकल्प दोहराया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास कार्यों को गति देने के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने राज्य की आर्थिक प्रगति, निवेश, स्टार्टअप, एमएसएमई और सौर ऊर्जा क्षेत्र में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश
वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में कुल 7,844.18 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें 4,164.32 करोड़ रुपये पूंजीगत मद और 3,679.86 करोड़ रुपये राजस्व मद के लिए रखे गए हैं।
मुख्य बजट का आकार 1,11,703.21 करोड़ रुपये है। अनुपूरक बजट जुड़ने के बाद कुल बजट बढ़कर 1,19,547.39 करोड़ रुपये हो जाएगा।
बजट में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सड़क, ऊर्जा और सामाजिक कल्याण से जुड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा धार्मिक आयोजनों, खेल सुविधाओं, डिजिटल शिक्षा और स्थानीय निकायों के लिए भी अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था की गई है।
किसानों से धान-गेहूं खरीद के लिए 1,100 करोड़
अनुपूरक बजट में किसानों से धान और गेहूं की खरीद के लिए अन्नपूर्ति योजना के तहत 1,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना के लिए 70 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना के लिए लगभग 35 करोड़ रुपये और दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के लिए 20 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
गोसदन निर्माण के लिए करीब 9 करोड़ रुपये तथा नई मौन पालन नीति के लिए 1 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से संबंधित योजनाओं को अतिरिक्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी है।
स्थानीय निकायों को अब 12.5 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रस्ताव
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार राज्य के कर राजस्व में स्थानीय निकायों की हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा आधारभूत ढांचे के विकास के लिए विशेष सहायता योजना के तहत 500 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों के रखरखाव के लिए लोक निर्माण विभाग के तहत 31 करोड़ रुपये और ग्राम्य विकास विभाग के अंतर्गत पीएमजीएसवाई के लिए 30 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
पेयजल, ऊर्जा और आपदा प्रभावित क्षेत्रों पर जोर
गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना के लिए 122 करोड़ रुपये और जल जीवन मिशन के तहत ठेकेदारों के बकाया भुगतान के लिए 300 करोड़ रुपये रखे गए हैं। केएफडब्ल्यू पोषित पेयजल परियोजना के लिए लगभग 110 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
ऊर्जा क्षेत्र में खुरपिया फार्म परियोजना सहित वितरण व्यवस्था के लिए करीब 270 करोड़ रुपये रखे गए हैं। जोशीमठ सहित भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक कार्यों के लिए 48 करोड़ रुपये और नए स्टेट डेटा सेंटर के निर्माण के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
पुलिस विभाग के आवासीय और अनावासीय भवनों के निर्माण के लिए 55 करोड़ रुपये तथा न्यायिक आधारभूत ढांचे के विकास के लिए 22 करोड़ रुपये रखे गए हैं। सरकार ने आपदा प्रबंधन, सुरक्षित निर्माण और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भी प्राथमिकता में शामिल किया है।
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के लिए अतिरिक्त धन
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए अटल आयुष्मान योजना के तहत 100 करोड़ रुपये और कर्मचारियों की गोल्डन कार्ड योजना के लिए 125 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
चिकित्सा शिक्षा के अंतर्गत पिथौरागढ़ और रुद्रपुर मेडिकल कॉलेजों सहित नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े कार्यों के लिए लगभग 160 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक संसाधन जुटाना है।
शिक्षा, डिजिटल लर्निंग और युवाओं पर फोकस
विद्यालयी और उच्च शिक्षा में डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना के तहत नीट, जेईई और क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग पर 5 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
खेल विश्वविद्यालय के लिए करीब 35 करोड़ रुपये, चंपावत में महिला स्पोर्ट्स कॉलेज के लिए 10 करोड़ रुपये और खिलाड़ियों के विशेष प्रशिक्षण शिविरों के लिए 8 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
ओपन जिम की स्थापना के लिए 5 करोड़ रुपये, खिलाड़ियों की छात्रवृत्ति के लिए लगभग 5.50 करोड़ रुपये तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार देने के लिए 15 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
दिव्य कुंभ, गंगा कॉरिडोर और धार्मिक यात्राओं की तैयारी
धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी परियोजनाओं के लिए भी अनुपूरक बजट में व्यवस्था की गई है।
आगामी दिव्य कुंभ की तैयारियों और अवस्थापना सुविधाओं के लिए विभिन्न मदों में लगभग 290 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर के कार्यों के लिए 30 करोड़ रुपये का पूंजीगत प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के साथ राज्य की विरासत और संस्कृति का संरक्षण भी सरकार की प्राथमिकता है। नंदा राजजात यात्रा और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
महिला कल्याण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को भी प्राथमिकता
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत कल्याणकारी पेंशन के लिए करीब 93 करोड़ रुपये और निराश्रित विधवा पेंशन के लिए लगभग 27 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
भोजन माताओं के मानदेय के लिए 20 करोड़ रुपये, सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के लिए करीब 60 करोड़ रुपये और मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मेगा इंडस्ट्रियल नीति के तहत अनुदान योजना के लिए 12 करोड़ रुपये भी रखे गए हैं। सरकार का कहना है कि इन व्यवस्थाओं के जरिए सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और औद्योगिक विकास से जुड़ी गतिविधियों को सहायता मिलेगी।
चार वर्षों में बढ़ा राज्य का आर्थिक आकार: धामी
विधानसभा सत्र के पहले दिन प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की आर्थिक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में उत्तराखंड का सकल राज्य घरेलू उत्पाद लगभग 2.55 लाख करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर लगभग 3.82 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
इसी अवधि में प्रति व्यक्ति आय लगभग 1.95 लाख रुपये से बढ़कर 2.74 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में स्टार्टअप की संख्या 702 से बढ़कर 1,978 और एमएसएमई इकाइयों की संख्या लगभग 60 हजार से बढ़कर एक लाख तक पहुंच गई है।
सौर ऊर्जा क्षमता में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड ने 79 अंकों के साथ संयुक्त रूप से देश में पहला स्थान प्राप्त किया।
धामी ने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग पर जोर दे रही है। बजट निर्माण में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए पिछले पांच वर्षों में किसानों, महिलाओं, युवाओं, उद्यमियों और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए गए हैं।
सदन में नौ विधेयक और दो अध्यादेश पेश
भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र की शुरुआत वंदे मातरम के साथ हुई। इसके बाद सदन ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि दी। दोनों नेताओं के निधन पर शोक व्यक्त करने के बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।
पहले दिन सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की अनुपूरक अनुदान मांगें पेश कीं। इसके साथ ही विभिन्न विभागों से संबंधित नौ विधेयक और दो अध्यादेश सदन के पटल पर रखे गए।
सदन में प्रस्तुत विधेयकों में उत्तराखंड सिंचाई जल निकासी विधेयक, 2026; उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026; उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना (विकास और विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2026; उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) द्वितीय विधेयक, 2026; उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2026; उत्तराखंड सिविल विधि (संशोधन) विधेयक, 2026; उत्तराखंड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, 2026; उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 तथा उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं।
इसके अलावा उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) अध्यादेश, 2026 और उत्तराखंड माल एवं सेवा कर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 भी सदन के पटल पर रखे गए। दिनभर की कार्यवाही पूरी होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन को बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
कुल मिलाकर, अनुपूरक बजट में किसानों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, पेयजल, ऊर्जा, खेल, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक सुरक्षा के लिए अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था की गई है।
अब इन प्रावधानों का वास्तविक लाभ समय पर धनराशि जारी होने और संबंधित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।



