उत्तराखंड में बदलेगा मौसम, 9 जिलों में बारिश-बर्फबारी के आसार। किसानों की फसलें खराब
देहरादून। उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। मौसम विभाग ने देहरादून समेत नौ जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई है।
वहीं, 3,800 मीटर या इससे अधिक ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी के आसार हैं। दूसरी ओर, प्रदेश में बीते दिनों हुई अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
कृषि विभाग की 9 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, खरीफ सीजन में 8,372.308 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ है। सबसे अधिक नुकसान ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जिलों में दर्ज किया गया है।
नौ जिलों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं हल्की बारिश के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली की संभावना है।
पर्वतीय क्षेत्रों में 3,800 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी हो सकती है, जबकि शेष जिलों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है।
देहरादून में आसमान साफ रहने से लेकर आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है। शाम के समय कुछ इलाकों में गरज वाले बादल विकसित हो सकते हैं।
शहर में अधिकतम तापमान 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। विभाग ने फिलहाल कोई मौसम अलर्ट जारी नहीं किया है, हालांकि लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
हेमकुंड साहिब में बर्फबारी से बढ़ी ठंड
चमोली जिले स्थित सिखों के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब में हाल के दिनों में रुक-रुककर बारिश और बर्फबारी हुई।
बर्फबारी के चलते गुरुद्वारा परिसर, लक्ष्मण मंदिर और आसपास की ऊंची चोटियां बर्फ की सफेद चादर से ढक गईं। इससे श्रद्धालुओं को मनमोहक प्राकृतिक दृश्य देखने को मिले, वहीं निचले इलाकों में भी ठंड बढ़ गई।
अतिवृष्टि से 8,372 हेक्टेयर खरीफ कृषि क्षेत्र प्रभावित
मौसम की मार का असर प्रदेश के किसानों पर भी पड़ा है। कृषि निदेशालय की 9 अक्टूबर तक की रिपोर्ट के मुताबिक, अतिवृष्टि और अन्य आपदा संबंधी घटनाओं से खरीफ 2026 की फसलों का 8,372.308 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
इसमें ऊधमसिंह नगर के 7,730 हेक्टेयर और हरिद्वार के 600.133 हेक्टेयर क्षेत्र का उल्लेख है। अन्य जिलों में करीब 42.175 हेक्टेयर प्रभावित क्षेत्र दर्ज किया गया है।
इन आंकड़ों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रफल का बड़ा हिस्सा मैदानी जिलों में केंद्रित है। हालांकि, प्रभावित क्षेत्रफल को पूरी तरह बर्बाद हुई फसल का क्षेत्रफल नहीं माना जा सकता। फसलवार नुकसान और वास्तविक आर्थिक क्षति का आकलन सर्वे पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
ऊधमसिंह नगर में धान-गन्ने को नुकसान, हरिद्वार में धान प्रभावित
ऊधमसिंह नगर के बाजपुर और गदरपुर क्षेत्रों में अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से धान तथा गन्ने की फसलों को नुकसान पहुंचा है।
विभागीय रिकॉर्ड में बेरिया दौलत, चंदनपुरा, महोली जंगल, मड़इया हट्टू, बांसखेड़ी, बन्नाखेड़ा, बरहैनी, हुलसनगंज, खमरिया, शिवपुरी और टांडा महमूद समेत कई गांवों का उल्लेख है।
हरिद्वार जिले में बहादराबाद क्षेत्र के अंतर्गत बहादराबाद, फेरुपुर और बादशाहपुर में करीब 600.133 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र प्रभावित दर्ज किया गया है। यहां मुख्य रूप से धान की फसल को नुकसान पहुंचने की जानकारी है।
पहाड़ी जिलों में बागवानी फसलों को भी नुकसान
बारिश और ओलावृष्टि का असर पहाड़ी क्षेत्रों में बागवानी, सब्जियों और पॉलीहाउस पर भी पड़ा है। कृषि मंत्री गणेश जोशी के कार्यालय से 10 अक्टूबर को जारी प्रेस नोट के अनुसार, अल्मोड़ा के चौखुटिया और लमगड़ा में बागवानी फसलों को 15 से 70 प्रतिशत तक नुकसान की जानकारी दी गई है।
चम्पावत के कुछ विकासखंडों में 33 प्रतिशत से अधिक, नैनीताल के हल्द्वानी, कोटाबाग और रामनगर क्षेत्रों में लगभग 10 प्रतिशत तथा देहरादून के रायपुर में 10 से 15 प्रतिशत नुकसान का आकलन बताया गया है।
इसके अलावा रुद्रप्रयाग में करीब 20 प्रतिशत और टिहरी के घनसाली क्षेत्र तथा पौड़ी के कुछ क्षेत्रों में लगभग 30 प्रतिशत नुकसान की जानकारी दी गई है। ये संबंधित क्षेत्रों के प्रारंभिक आकलन हैं, न कि पूरे जिले की फसलों के नुकसान का अंतिम आंकड़ा।
सेब और सब्जियों की फसल खराब होने पर मुआवजे की मांग
देहरादून जिले के चकराता क्षेत्र के त्यूनी स्थित सिड़िया गांव के किसान जोगेंद्र सिंह ने बताया कि बेमौसम बारिश से सेब के साथ टमाटर, शिमला मिर्च, फूलगोभी और बंदगोभी की फसलों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।
हालांकि, त्यूनी क्षेत्र में प्रभावित फसल के कुल रकबे, किसानों की संख्या और आर्थिक नुकसान के आधिकारिक आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं। इसके लिए विस्तृत सर्वे और विभागीय आंकड़ों का मिलान जरूरी है।
नियमानुसार मुआवजे का भरोसा, संयुक्त सर्वे जारी
कृषि मंत्री गणेश जोशी के अनुसार, प्रभावित किसानों को केंद्र सरकार के निर्धारित मानकों के तहत सहायता दी जाएगी।
प्रेस नोट के मुताबिक, प्रारंभिक सर्वे किया जा चुका है और विभागीय तथा राजस्व कार्मिकों की ओर से संयुक्त सर्वे की कार्रवाई जारी है। फसल बीमा कराने वाले किसानों की क्षति संबंधी रिपोर्ट बीमा कंपनियों को भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है।
केंद्र के निर्धारित मानकों के तहत 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर या लागू नियमों के अनुसार सहायता का उल्लेख किया गया है। हालांकि, वास्तविक सहायता प्रभावित फसल, नुकसान की श्रेणी और लागू पात्रता मानकों के आधार पर तय होगी।
2030 तक बागवानी में बड़े लक्ष्य की तैयारी
फसलों को हुए नुकसान के बीच राज्य सरकार बागवानी उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। कृषि मंत्री ने कीवी और सेब के उत्पादन को प्रोत्साहित करने तथा हाई-डेंसिटी बागवानी को बढ़ावा देने की बात कही है। लक्ष्य वर्ष 2030 तक उत्तराखंड को बागवानी के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के बराबर पहुंचाना है।
फिलहाल प्रभावित किसानों के लिए नुकसान का सटीक आकलन, समय पर राहत और मुआवजा प्राथमिकता है। वहीं, भविष्य में मौसम की मार से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए बागवानी तकनीक, सिंचाई सुविधाओं और किसानों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना भी अहम होगा।



