शर्मनाक: पिथौरागढ़ का झकझोर देने वाला मामला, अस्पताल में खुला बाल विवाह का राज

पिथौरागढ़ का झकझोर देने वाला मामला, अस्पताल में खुला बाल विवाह का राज

पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिला से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है।

जहां महज 14 साल की एक किशोरी के गर्भवती होने का खुलासा तब हुआ जब उसे प्रसव पीड़ा के चलते अस्पताल लाया गया। यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज और व्यवस्था की कई परतों को उजागर करती है।

जन्मतिथि से खुली सच्चाई

शनिवार शाम कुछ लोग किशोरी को प्रसव पीड़ा में जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जब डॉक्टरों ने दस्तावेजों की जांच की, तो पता चला कि उसका जन्म वर्ष 2012 में हुआ है यानी उसकी उम्र केवल 14 साल है। इतनी कम उम्र में गर्भावस्था को गंभीर मानते हुए अस्पताल प्रशासन ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।

13 साल में कर दी गई शादी

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि किशोरी की शादी महज 13 साल की उम्र में मुनस्यारी क्षेत्र के एक युवक से चोरी-छिपे कर दी गई थी। शादी के बाद वह कथित पति के घर रह रही थी और इसी दौरान गर्भवती हो गई।

पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO) की धारा 5/6 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस को यह भी आशंका है कि आरोपी युवक खुद भी नाबालिग हो सकता है, जिसकी जांच जारी है।

पारिवारिक हालात भी जिम्मेदार

जानकारी के मुताबिक, किशोरी का पारिवारिक माहौल भी अस्थिर रहा। जब वह करीब 10 साल की थी, उसकी मां और पिता दोनों ने अलग-अलग दूसरी शादियां कर लीं। इसके बाद उसकी देखरेख कमजोर हो गई और इसी बीच उसकी चोरी-छिपे शादी करा दी गई।

अस्पताल में नाजुक हालत

फिलहाल किशोरी जिला महिला अस्पताल में भर्ती है। डॉक्टरों के अनुसार कम उम्र और शारीरिक कमजोरी के चलते जच्चा-बच्चा दोनों की स्थिति जोखिमपूर्ण बनी हुई है। लगातार मेडिकल निगरानी और जांच की जा रही है।

रिश्तेदारों ने भी छोड़ा साथ

कानूनी कार्रवाई शुरू होते ही साथ आए रिश्तेदारों ने भी दूरी बना ली। डरी-सहमी किशोरी अस्पताल में अकेले ही इस मुश्किल दौर से गुजर रही है, जो इस घटना को और भी मानवीय रूप से दर्दनाक बना देता है।

जांच में और खुलासे संभव

मामले की जांच कर रही पुलिस टीम हर पहलू की पड़ताल कर रही है। यह भी जांच का विषय है कि इतने गंभीर बाल विवाह की जानकारी स्थानीय प्रशासन या ग्राम स्तर पर किसी को क्यों नहीं हुई। आशंका है कि जांच में ऐसे लोगों के नाम सामने आ सकते हैं, जिन्होंने इस अवैध विवाह को संभव बनाया।

बड़ा सवाल: आखिर कब रुकेगी यह कुप्रथा?

यह घटना केवल एक परिवार या एक गांव की नहीं, बल्कि समाज की उस सच्चाई को सामने लाती है जहां आज भी बाल विवाह जैसी कुप्रथाएं जिंदा हैं। कानून सख्त हैं, लेकिन जागरूकता और निगरानी की कमी ऐसे मामलों को जन्म देती है।

यह मामला प्रशासन, समाज और परिवार तीनों के लिए एक चेतावनी है कि अगर समय रहते हस्तक्षेप न किया जाए, तो न जाने कितने बचपन ऐसे ही कुचलते रहेंगे।