बिग ब्रेकिंग: IPS प्रतिनियुक्ति मामले में CAT से नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी को बड़ी राहत, केंद्र के आदेश पर रोक

IPS प्रतिनियुक्ति मामले में CAT से नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी को बड़ी राहत, केंद्र के आदेश पर रोक

देहरादून। उत्तराखंड के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है।

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (Central Administrative Tribunal – CAT) ने मामले में अहम दखल देते हुए फिलहाल प्रतिनियुक्ति से जुड़े आदेश पर रोक लगा दी है। इससे दोनों अधिकारियों नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी को बड़ी राहत मिली है।

बिना सहमति भेजी गई प्रतिनियुक्ति पर सवाल

पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने 5 मार्च 2026 को दोनों अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के आदेश जारी किए।

  • नीरू गर्ग को ITBP में डीआईजी पद पर
  • अरुण मोहन जोशी को BSF में डीआईजी पद पर तैनाती दी गई

इसके तुरंत बाद 6 मार्च को राज्य सरकार ने भी दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त कर प्रतिनियुक्ति पर भेजने के आदेश जारी कर दिए। हालांकि, दोनों अधिकारियों ने इस फैसले को बिना सहमति और नियमों के खिलाफ बताते हुए कानूनी चुनौती दी।

हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, CAT का दरवाजा खटखटाया

पहले दोनों अधिकारियों ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की, लेकिन वहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। कोर्ट ने उन्हें उचित मंच के रूप में CAT जाने की सलाह दी।

इसके बाद अधिकारियों ने CAT में अपील की, जहां सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने अंतरिम राहत देते हुए प्रतिनियुक्ति आदेश पर रोक लगा दी।

‘डिमोशन जैसा’ बताया गया आदेश

याचिका में अधिकारियों ने कई गंभीर तर्क रखे

  • उन्होंने कभी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन या सहमति नहीं दी।
  • वे पहले ही केंद्रीय सेवाओं में जाने से अनिच्छा जता चुके थे।
  • आईजी रैंक के अधिकारी होने के बावजूद डीआईजी पद पर भेजना पेशेवर रूप से पदावनति (Demotion) जैसा है।

उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें पहले ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से निर्धारित अवधि के लिए छूट मिल चुकी थी।

CAT ने मांगा जवाब, 4 हफ्ते की मोहलत

CAT ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह पूरे मामले में अपनाई गई प्रक्रिया, संबंधित नियम और निर्णय के आधार से जुड़े दस्तावेज चार सप्ताह के भीतर पेश करे।

क्या हैं इसके मायने?

यह मामला न सिर्फ दो अधिकारियों की पोस्टिंग का है, बल्कि यह केंद्र-राज्य संबंधों, सेवा नियमों और अधिकारियों की सहमति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी सामने लाता है।

फिलहाल, CAT के इस फैसले के बाद दोनों अधिकारी उत्तराखंड में अपने पद पर बने रहेंगे, जबकि मामले की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।