अल्मोड़ा में कार पलटी, हरिद्वार में दो बसों की टक्कर। करीब 17 घायल
देहरादून। उत्तराखंड में सड़क हादसों का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा मामलों में अल्मोड़ा और हरिद्वार में हुए दो अलग-अलग हादसों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन घटनाओं में कुल मिलाकर करीब 17 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
अल्मोड़ा: नींद की झपकी बनी जानलेवा, पहाड़ी से टकराकर पलटी कार
अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र में शशिखाल बाजार के पास दर्दनाक हादसा सामने आया। दिल्ली से अपने पैतृक गांव जा रही स्विफ्ट डिजायर कार अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पहाड़ी से टकरा गई और पलट गई।
कार में सवार दरबान सिंह रावत, उनकी पत्नी निर्मल रावत और भाभी माधुरी रावत इस हादसे का शिकार हुए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार पलटते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई।
स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए कार में फंसे लोगों को बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। हादसे में निर्मल रावत और माधुरी रावत गंभीर रूप से घायल हो गईं, जबकि चालक दरबान सिंह को मामूली चोटें आई हैं।
घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवालय ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि चालक को नींद की झपकी आने से यह हादसा हुआ।
हरिद्वार: बारात की खुशियां मातम में बदलीं, दो बसों की भीषण टक्कर
हरिद्वार-नजीबाबाद हाईवे पर रसियाबड़ गांव के पास मंगलवार शाम एक भीषण सड़क हादसा हो गया। यहां बारातियों से भरी प्राइवेट बस और रोडवेज बस के बीच आमने-सामने की टक्कर हो गई।
हादसा इतना भयानक था कि दोनों बसों के अगले हिस्से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। टक्कर के बाद बस में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार गूंज उठी।
इस दुर्घटना में करीब 10 से 15 बाराती घायल हो गए, जिनमें से पांच की हालत गंभीर बताई जा रही है। दो यात्री बस के अंदर बुरी तरह फंस गए थे, जिन्हें पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोहा काटकर बाहर निकाला।
घायलों को तत्काल एम्बुलेंस की मदद से जिला अस्पताल भेजा गया, जबकि अन्य को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया। जानकारी के मुताबिक, बारात देहरादून से बिजनौर के नागलसोती लौट रही थी।
बड़ा सवाल: आखिर कब थमेंगे ये हादसे?
उत्तराखंड में लगातार हो रहे सड़क हादसे गंभीर चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में नींद, थकान और खराब सड़कें तो मैदानी इलाकों में तेज रफ्तार और लापरवाही हादसों की बड़ी वजह बन रही हैं।
प्रशासन और परिवहन विभाग के तमाम दावों के बावजूद हादसों में कमी नहीं आ रही है। जरूरत है सख्त निगरानी, जागरूकता और जिम्मेदार ड्राइविंग की, ताकि इन हादसों पर लगाम लगाई जा सके। फिलहाल पुलिस दोनों मामलों की जांच में जुटी है और हादसों के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है।



