खतरे में हरिद्वार के जंगल, क्रेशर संचालकों का अतिक्रमण या सिस्टम की मिलीभगत?….
रिपोर्ट- सलमान मलिक
हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ वन भूमि की सुरक्षा को लेकर टकराव तेज हो गया है। बंजारेवाला ग्रांट क्षेत्र में क्रेशर संचालकों पर जंगल की जमीन पर अतिक्रमण के गंभीर आरोप लगे हैं।
लेकिन मामला तब पेचीदा हो गया जब कार्रवाई से बचने के लिए कुछ संचालकों ने वन विभाग के अधिकारियों पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लगाने शुरू कर दिए। सवाल उठता है, क्या ये आरोप सच हैं या ईमानदार कार्रवाई को रोकने की रणनीति?
बंजारेवाला ग्रांट क्षेत्र से सामने आई तस्वीरें विकास और विनाश के बीच की खतरनाक रेखा को दिखाती हैं। आरोप है कि कई क्रेशर संचालक नियमों की अनदेखी कर आरक्षित वन भूमि तक पहुंच गए हैं।
इससे न केवल जंगल की हरियाली प्रभावित हो रही है, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक गलियारे भी बाधित हो रहे हैं।
एक ओर जहाँ अतिक्रमण के आरोपों ने चिंता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के कुछ अधिकारी इस “ग्रीन गोल्ड” को बचाने के लिए मोर्चा संभाले हुए हैं। बीट अधिकारी लव सिंह और तिरपन सिंह अपनी टीम के साथ लगातार गश्त कर रहे हैं ताकि जंगल की जमीन को बचाया जा सके।
लेकिन इस कार्रवाई के बीच इन अधिकारियों पर ही अवैध उगाही के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे मामला और अधिक उलझ गया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि जंगल तेजी से खत्म हो रहे हैं और जो अधिकारी ईमानदारी से काम कर रहे हैं, उन्हें बदनाम कर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी हरिद्वार कार्यालय को पत्र लिखकर मांग की है कि वन भूमि का तकनीकी सीमांकन कराया जाए, ताकि स्पष्ट हो सके कि असल में दोषी कौन है।
अब नजर प्रशासन पर टिकी है। क्या निष्पक्ष जांच के जरिए सच सामने आएगा या फिर जंगल और ईमानदार अधिकारी दोनों ही इस दबाव में झुक जाएंगे?
हरिद्वार के इन “हरे फेफड़ों” की लड़ाई में अगला कदम क्या होगा? इस पर हमारी नजर लगातार बनी रहेगी।




