उत्तराखंड के बाद UCC लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बना गुजरात
गांधीनगर। गुजरात विधानसभा ने मंगलवार को सात घंटे से अधिक चली लंबी बहस के बाद बहुमत से यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पास कर दिया। इसके साथ ही गुजरात, उत्तराखंड के बाद देश का दूसरा राज्य बन गया है, जिसने समान नागरिक संहिता को अपनाया है।
क्या है UCC बिल?
‘गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026′ नाम का यह कानून राज्य में सभी नागरिकों के लिए धर्म की परवाह किए बिना शादी, तलाक, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में एक समान कानूनी ढांचा लागू करने का प्रस्ताव रखता है।
यह बिल उस समय पेश किया गया जब राज्य सरकार द्वारा नियुक्त पैनल ने UCC लागू करने पर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी।
किन पर लागू होगा?
यह कानून पूरे गुजरात राज्य और उसके बाहर रहने वाले गुजरात के निवासियों पर भी लागू होगा। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों (ST) और कुछ पारंपरिक अधिकार वाले समूहों को इससे बाहर रखा गया है, जिनके अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित हैं।
बिल की प्रमुख विशेषताएं
- लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य:
लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को अपने संबंध का पंजीकरण कराना होगा, साथ ही उसे समाप्त करने के लिए भी निर्धारित प्रक्रिया होगी। - एक पत्नी/पति का नियम (Monogamy):
कोई भी व्यक्ति तब तक दूसरी शादी नहीं कर सकता, जब तक उसका पहला जीवनसाथी जीवित है। - शादी की वैधता के नियम:
शादी तभी वैध मानी जाएगी जब विवाह के समय दोनों में से किसी का कोई जीवित जीवनसाथी न हो। - तलाक और विरासत के लिए समान नियम:
सभी धर्मों के लिए एक समान प्रक्रिया और अधिकार तय किए जाएंगे।
पहले कौन था आगे?
उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में UCC लागू कर देश में इस दिशा में पहला कदम उठाया था। अब गुजरात का यह फैसला राष्ट्रीय स्तर पर इस बहस को और तेज कर सकता है।
क्यों अहम है यह कदम?
बिल के “उद्देश्य और कारण” में कहा गया है कि इसका मकसद समानता, पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करना है, ताकि अलग-अलग पर्सनल लॉ के बजाय एक समान कानून लागू हो सके।




