एक्सक्लूसिव: RTI खुलासे से घिरा BKTC, नियमों में बदलाव और महंगी पूजा पर विवाद

RTI खुलासे से घिरा BKTC, नियमों में बदलाव और महंगी पूजा पर विवाद

देहरादून। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के हालिया प्रस्तावों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर समिति के निर्णयों पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं और इन्हें जनहित तथा धार्मिक गरिमा के खिलाफ बताया है।

विकेश सिंह नेगी ने बताया कि उन्होंने बीकेटीसी की वर्तमान बोर्ड बैठकों से संबंधित जानकारी मांगी थी, जिसके तहत 9 जुलाई 2025 को आयोजित बैठक के प्रस्तावों की प्रतियां उन्हें उपलब्ध कराई गईं।

इन दस्तावेजों के अध्ययन में दो प्रमुख बिंदु सामने आए सीईओ पद की अर्हता में बदलाव और विशेष पूजा के लिए 11 लाख रुपये का प्रस्ताव।

सीईओ पद की अर्हता में बदलाव पर आपत्ति

नेगी ने कहा कि वर्ष 2023 की सेवा नियमावली में सीईओ पद के लिए प्रथम श्रेणी राजपत्रित अधिकारी होना अनिवार्य किया गया था, जिससे प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। लेकिन वर्तमान बोर्ड ने इस प्रावधान को हटाने की सिफारिश करते हुए इसे अव्यावहारिक बताया है।

उन्होंने इसे गलत ठहराते हुए कहा कि देश के प्रमुख धार्मिक संस्थानों में आमतौर पर आईएएस या वरिष्ठ पीसीएस अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है, जिससे व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित होती हैं। ऐसे में इस अनिवार्यता को हटाना संस्था की कार्यप्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ सकता है असर

नेगी का कहना है कि बीकेटीसी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में उच्च प्रशासनिक अनुभव आवश्यक है। यदि केवल स्नातक योग्यता के आधार पर नियुक्तियां की जाती हैं, तो इससे निर्णय प्रक्रिया और जवाबदेही दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

11 लाख की विशेष पूजा प्रस्ताव पर भी सवाल

आरटीआई से यह भी सामने आया है कि बीकेटीसी ने विशेष पूजा के लिए न्यूनतम 11 लाख रुपये शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा है। इस पर नेगी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंदिरों में आस्था का स्थान सर्वोपरि होना चाहिए, न कि आर्थिक स्थिति के आधार पर विशेष सुविधाएं।

उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रस्ताव धार्मिक स्थलों में वर्गभेद और व्यावसायिकता को बढ़ावा दे सकते हैं, जो परंपराओं के विपरीत है।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

विकेश सिंह नेगी ने राज्य सरकार से मांग की है कि इन प्रस्तावों की गंभीरता से समीक्षा की जाए और ऐसे निर्णयों को रोका जाए, जो बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की गरिमा और पारदर्शिता को प्रभावित कर सकते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन प्रस्तावों को वापस नहीं लिया गया, तो वह जनहित में इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।