काफल फेस्टिवल 2026: संस्कृति, प्रकृति और परंपरा का संगम, तीन दिन तक छाया उत्सव का रंग
देहरादून। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को समर्पित काफल फेस्टिवल 2026 का 20 से 22 मार्च तक सफल आयोजन किया गया। तीन दिवसीय इस आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों ने भाग लिया।
इस फेस्टिवल को विभिन्न संस्थानों और स्थानीय साझेदारों का सहयोग मिला, जिसमें देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय मुख्य सह-प्रायोजक के रूप में शामिल रहा। आयोजन के दौरान उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं की झलक हर गतिविधि में देखने को मिली।
फेस्टिवल में योग सत्र, फॉरेस्ट रन (हाफ मैराथन), फॉरेस्ट राइड (MTB चैलेंज), आर्ट एवं क्राफ्ट गतिविधियां, कवि सम्मेलन, पारंपरिक “खैंचा-ताणी” सांस्कृतिक कार्यक्रम और नाइट स्काई वर्कशॉप जैसी विविध गतिविधियों ने प्रतिभागियों को खासा आकर्षित किया।
इसके साथ ही वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी, बर्डिंग (पक्षी अवलोकन), कैमरा सेटिंग्स और हिमालयन इकोलॉजी से जुड़े सत्रों ने पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्थानीय हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों की प्रदर्शनी भी इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही, जहां कारीगरों ने अपने हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया।
वहीं खान-पान के स्टॉल्स में मंडुवे (रागी) से बने व्यंजन और पारंपरिक पहाड़ी पकवानों ने लोगों का दिल जीत लिया, जिससे स्थानीय किसानों और छोटे उद्यमियों को भी बढ़ावा मिला।
आयोजन में शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि वे शिक्षा के साथ-साथ समाज, संस्कृति और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी निभा रहे हैं।
फेस्टिवल का समापन प्रसिद्ध लोक संगीत समूह पांडवाज़ की ऊर्जावान प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने पूरे माहौल को उत्साह से भर दिया और इस आयोजन को यादगार बना दिया।
आयोजन को सफल बनाने में विभिन्न स्थानीय होमस्टे, होटल और संस्थानों का भी अहम योगदान रहा, जिन्होंने व्यवस्थाओं और सहभागिता को मजबूत करते हुए इस सांस्कृतिक महोत्सव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।




