बड़ी खबर: उत्तरकाशी से काशीपुर तक IT का एक्शन, करोड़ों के लेन-देन पर संदेह
देहरादून। उत्तराखंड के सहकारी बैंक इन दिनों जांच और आरोपों के घेरे में हैं। आयकर विभाग ने प्रदेश के कई शहरों में संचालित कॉपरेटिव बैंकों पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
आरोप है कि इन बैंकों ने सैकड़ों करोड़ रुपये के वित्तीय लेन-देन की जानकारी या तो छुपाई या गलत तरीके से पेश की।
जानकारी के मुताबिक विभाग ने उत्तरकाशी, कोटद्वार और काशीपुर में संचालित सहकारी बैंकों में सर्वे और जांच अभियान चलाया।
जांच के दौरान सामने आया कि करीब 800 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन छुपाए गए, जबकि 400 करोड़ रुपये की गलत रिपोर्टिंग की गई। इस तरह कुल 1200 करोड़ रुपये के लेन-देन पर सवाल खड़े हुए हैं।
यह जांच वित्तीय वर्ष 2021-22 से अब तक के रिकॉर्ड के आधार पर आयकर अधिनियम की धारा 133A के तहत की गई।
विभाग का मानना है कि यह मामला गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है, जिसके चलते संबंधित बैंकों पर भारी पेनल्टी लगाई जा सकती है।
वहीं हरिद्वार स्थित जिला सहकारी बैंक भी जांच के दायरे में है। शुरुआती संकेतों में यहां भी बड़े स्तर पर अंडर-रिपोर्टिंग की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर सहकारिता विभाग उत्तराखंड ने अलग रुख अपनाया है। विभाग की अपर निबंधक ईरा उप्रेती ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी नहीं पाई गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आयकर विभाग की जांच केवल SFT (Statement of Financial Transaction) रिटर्न के सत्यापन से जुड़ी थी।
इस दौरान कुछ मामलों में तकनीकी त्रुटियां सामने आई थीं, जिन्हें समय रहते सुधार लिया गया है। वर्तमान में इस संबंध में कोई आपत्ति लंबित नहीं है।
एक ओर जहां आयकर विभाग इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए कार्रवाई की तैयारी में है, वहीं सहकारिता विभाग इसे महज तकनीकी खामी बता रहा है। ऐसे में अब सबकी नजरें जांच के अंतिम निष्कर्ष और संभावित पेनल्टी पर टिकी हैं।



