बिग ब्रेकिंग: फीस बकाया पर छात्रों के मूल प्रमाणपत्र रोकना अवैध: तेलंगाना हाईकोर्ट

फीस बकाया पर छात्रों के मूल प्रमाणपत्र रोकना अवैध: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक संस्थान केवल फीस बकाया होने के आधार पर छात्रों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र (मार्कशीट, डिग्री आदि) रोक नहीं सकते।

जस्टिस सुरेपल्ली नंदा की एकल पीठ ने कहा कि ये प्रमाणपत्र छात्र की संपत्ति हैं और इन्हें फीस वसूली के लिए दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि यदि किसी छात्र की फीस बकाया है तो संस्थान को उसकी वसूली के लिए संबंधित सक्षम अदालत में कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए, न कि छात्रों के मूल दस्तावेज अपने पास रखकर उन्हें बाध्य करना चाहिए।

मामला उस समय सामने आया जब याचिकाकर्ता भाषापाका प्रज्ञा वर्धिनी ने 2024 में महिंद्रा यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बी.टेक पूरा किया।

दीक्षांत समारोह में उन्हें केवल प्रोविजनल सर्टिफिकेट दिया गया, जबकि कथित फीस बकाया का हवाला देकर विश्वविद्यालय ने उनकी मूल मार्कशीट और डिग्री रोक ली।

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण वह तुरंत फीस जमा नहीं कर पाईं, जिसके चलते उनके उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यूजीसी (छात्र शिकायत निवारण) विनियम 2018 और यूजीसी के 2007 के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि संस्थान छात्रों के मूल प्रमाणपत्र रोक नहीं सकते।

अंततः हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को सभी मूल प्रमाणपत्र तुरंत वापस करे।