गैस सिलेंडर को लेकर अफवाहों से बढ़ी परेशानी। ऑनलाइन बुकिंग ठप, रेस्टोरेंट कारोबार पर असर
देहरादून। ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच देश में गैस सिलेंडर को लेकर घबराहट का माहौल बन गया है।
उत्तराखंड में भी अफवाहों और आशंकाओं के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने एक साथ गैस सिलेंडर की बुकिंग कर दी, जिससे ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम पर असामान्य दबाव पड़ गया और कई बार सर्वर ठप हो गया। हालांकि तेल कंपनियों और प्रशासन का कहना है कि प्रदेश में फिलहाल गैस की कोई कमी नहीं है।
ऑनलाइन सिस्टम पर पड़ा भारी दबाव
जानकारी के अनुसार उत्तराखंड में एलपीजी के करीब 60 लाख उपभोक्ता हैं। इनमें से लगभग 42 लाख उपभोक्ता इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) से जुड़े हैं, जबकि बाकी उपभोक्ता भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) से गैस प्राप्त करते हैं।
अचानक बढ़ी बुकिंग का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 12 मार्च की रात 12 से 2 बजे के बीच मात्र दो घंटे में करीब 29 हजार उपभोक्ताओं ने गैस बुकिंग कर दी, जबकि सामान्य दिनों में पूरे प्रदेश में 24 घंटे में औसतन लगभग 47 हजार बुकिंग होती हैं।
इतनी अधिक बुकिंग होने से ऑनलाइन सर्वर पर दबाव बढ़ गया और कई उपभोक्ताओं को बुकिंग में परेशानी होने लगी।
मैन्युअल बुकिंग का विकल्प शुरू
ऑनलाइन व्यवस्था प्रभावित होने के बाद कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए मैन्युअल यानी ऑफलाइन बुकिंग की सुविधा शुरू कर दी है।
अब उपभोक्ता गैस एजेंसी या डिलीवरीमैन ऐप के माध्यम से भी बुकिंग दर्ज करा सकते हैं। रिकॉर्ड एजेंसी के पास सुरक्षित रहेगा और तय समय पूरा होने पर सिलेंडर की डिलीवरी दी जाएगी।
तेल कंपनियों के अनुसार प्रदेश में फिलहाल करीब 12 से 14 दिन का गैस स्टॉक उपलब्ध है और रोजाना लगभग 49 हजार सिलेंडरों की डिलीवरी की जा रही है। इसलिए उपभोक्ताओं से अफवाहों पर ध्यान न देने और जरूरत के अनुसार ही बुकिंग करने की अपील की गई है।
नैनीताल में रेस्टोरेंट कारोबार प्रभावित
इधर सरोवर नगरी नैनीताल में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कथित कमी और बढ़ती कीमतों का असर रेस्टोरेंट कारोबार पर पड़ने लगा है। समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण कई रेस्टोरेंट संचालकों को किचन चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कुछ रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस की कमी के कारण उन्हें लकड़ी, कोयले या इंडक्शन चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं कुछ छोटे रेस्टोरेंट और ढाबे अस्थायी रूप से बंद होने की स्थिति में भी पहुंच गए हैं।
कारोबारियों का यह भी आरोप है कि बाजार में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे छोटे व्यापारियों के लिए सिलेंडर खरीदना मुश्किल हो गया है। इसका असर बजट होटलों, फूड वैन और छोटे खाद्य कारोबारियों पर भी पड़ रहा है।
प्रशासन ने अफवाहों से बचने की अपील की
जिला प्रशासन और पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों और घबराहट में गैस का अनावश्यक भंडारण न करें। प्रशासन का कहना है कि जिले में गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थिति पर नजर रखते हुए अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि गैस आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
कांग्रेस ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार, भाजपा ने बताया ‘भ्रम फैलाने की राजनीति’
वहीं गैस संकट को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा के प्रदेश अध्यक्षों ने इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर निशाना साधा है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने गैस संकट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार के विभागों में आपसी तालमेल का अभाव है और हर विभाग अपनी-अपनी डफली बजा रहा है।
पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले समय में गैस की किल्लत और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों पर निर्भरता को ध्यान में रखते हुए पूरे देश में वैकल्पिक व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
गोदियाल ने कहा कि यह उम्मीद की जा सकती है कि सरकार इस दिशा में कुछ सोच रही होगी, लेकिन उनका मानना है कि इस किल्लत से पहले ही बचा जा सकता था।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ईरान ने अन्य देशों को अपने पैसेज से सहूलियत दी है, उसी तरह की सहूलियत भारत को भी मिलनी चाहिए थी।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कूटनीति पहले की तरह मजबूत नहीं रही, जिसका परिणाम यह है कि देश को आज पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने विपक्ष पर पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता और कीमत को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है।
मीडिया के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध के कारण पूरी दुनिया एक बड़े संकट से गुजर रही है। इसके चलते भारत के पड़ोसी देशों से लेकर यूरोप और अमेरिका तक कई देशों में पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतों में उछाल देखा जा रहा है।
भट्ट ने कहा कि इसके बावजूद मोदी सरकार की रणनीतिक तैयारियों का ही परिणाम है कि देश में कहीं भी पेट्रोलियम पदार्थों की इस तरह की किल्लत नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस और विपक्ष के नेताओं पर आरोप लगाया कि वे इस वैश्विक संकट का भी राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। यही कारण है कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से गैस की कमी और महंगाई को लेकर तरह-तरह के भ्रम फैलाए जा रहे हैं।



