बिग ब्रेकिंग: सड़कों की बदहाली पर हाईकोर्ट की सख्ती, दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

सड़कों की बदहाली पर हाईकोर्ट की सख्ती, दो हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल जिले की बदहाल सड़कों और पर्यावरण के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर दायर जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

सुनवाई के बाद कोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि नैनीताल–कैंची धाम और नैनीताल–हल्द्वानी मार्ग पर टूटे हुए पैराफिट और क्रैश बैरियर को ठीक किया जाए।

इसके साथ ही सड़कों के किनारे जमा मलबा और कूड़ा हटाकर दो सप्ताह के भीतर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।

सरकार की ओर से पेश किया गया शपथ पत्र

बुधवार (11 मार्च) को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर बताया गया कि नैनीताल–कालाढूंगी मार्ग पर टूटे हुए पैराफिट और क्रैश बैरियर को दुरुस्त कर दिया गया है।

इस पर अदालत ने नैनीताल–कैंची धाम और नैनीताल–हल्द्वानी मार्ग पर भी इसी तरह सुरक्षा व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। अदालत ने सड़कों के किनारों पर फैले मलबे और कूड़े को भी तत्काल हटाने के आदेश दिए।

क्या है मामला

दरअसल, अनिल यादव ने नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर जिले के पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध डंपिंग का मुद्दा उठाया है। याचिका में कचरा प्रबंधन की विफलता और निर्माण कार्यों के मलबे को सड़कों के किनारे फेंके जाने की शिकायत की गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डीसीएस रावत और जय कृष्ण पांडे ने अदालत को बताया कि हल्द्वानी–नैनीताल, कालाढूंगी और भवाली–कैंची धाम जैसे व्यस्त मार्गों पर निर्माण कार्यों का मलबा जानबूझकर तीखे मोड़ों और ब्लाइंड टर्न पर डाला जा रहा है।

इससे यातायात बाधित हो रहा है और मानसून के दौरान सड़क पर फिसलन बढ़ने से हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है।

याचिका में यह भी कहा गया कि कई स्थानों पर सुरक्षा दीवारें और क्रैश बैरियर तक नहीं हैं, जिससे स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और पर्यटकों की जान जोखिम में रहती है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सड़कों के किनारे जमा मलबा और कूड़ा हटाने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।