बिग ब्रेकिंग: उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, मैक्स हेल्थकेयर और डॉक्टर को अंतरिम राहत

उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, मैक्स हेल्थकेयर और डॉक्टर को अंतरिम राहत

नैनीताल। उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल की आचार, अनुशासन और पंजीकरण समिति द्वारा पारित एक विवादास्पद आदेश पर नैनीताल हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट लिमिटेड और डॉ. आनंद मोहन ठाकुर की ओर से दायर विशेष अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम राहत प्रदान की।

इस आदेश के बाद अस्पताल और संबंधित डॉक्टर को फिलहाल किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा मिल गई है।

अपीलकर्ताओं की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि मेडिकल काउंसिल की अनुशासन समिति के पास केवल सिफारिश करने की शक्ति होती है और वह स्वयं कोई अंतिम दंडात्मक आदेश पारित नहीं कर सकती।

उनका कहना था कि समिति ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह फैसला दिया, जो कानूनन गलत है।
मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल यह भी उठाया गया कि क्या उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल एक्ट, 2002 के तहत किसी अस्पताल के खिलाफ शिकायत दर्ज की जा सकती है।

अपीलकर्ताओं ने अदालत को बताया कि अधिनियम की धारा 2(7) के अनुसार ‘मेडिकल प्रैक्टिशनर’ की परिभाषा में केवल डॉक्टर आते हैं, निजी अस्पताल नहीं। इसलिए अस्पताल के खिलाफ काउंसिल की जांच या आदेश वैधानिक रूप से अवैध है।

इससे पहले नैनीताल हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अपीलकर्ताओं को वैकल्पिक उपाय अपनाने की सलाह देते हुए उनकी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था।

इसके बाद अपीलकर्ताओं ने खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया और दलील दी कि जब कोई आदेश पूरी तरह से अधिकार क्षेत्र के बिना पारित किया गया हो, तो रिट याचिका सीधे सुनने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।

अपीलकर्ताओं ने दिया यह तर्क

अपीलकर्ताओं ने यह भी कहा कि एकल पीठ ने ‘महाराजा अग्रसेन अस्पताल बनाम मास्टर ऋषभ शर्मा’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के जिस फैसले का हवाला दिया था, वह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम से संबंधित था।

उनका कहना था कि उपभोक्ता मामलों के सिद्धांत उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल एक्ट जैसे विशेष अनुशासनात्मक कानून पर लागू नहीं होते, जहां केवल व्यक्तिगत चिकित्सकों की जवाबदेही तय की जाती है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ ने इसे विचारणीय मानते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने 4 फरवरी 2026 को अनुशासन समिति द्वारा दिए गए आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी, जिसमें मेडिकल काउंसिल को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।