बिग ब्रेकिंग: UKSSSC भर्ती विवाद में चंदन सिंह को राहत, नियुक्ति की अनुमति। समीर अहमद हत्याकांड में आरोपी को जमानत

UKSSSC भर्ती विवाद में चंदन सिंह को राहत, नियुक्ति की अनुमति। समीर अहमद हत्याकांड में आरोपी को जमानत

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दो अलग-अलग मामलों में अहम फैसले सुनाए हैं. एक ओर वर्कशॉप अनुदेशक भर्ती विवाद में चयनित उम्मीदवार चंदन सिंह को बड़ी राहत देते हुए उसके चयन को सही ठहराया, वहीं किच्छा के समीर अहमद हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए आरोपी जसविंदर सिंह को जमानत दे दी है।

वर्कशॉप अनुदेशक भर्ती मामले में राहत

यह मामला वर्ष 2023 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा प्राविधिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत वर्कशॉप अनुदेशक के पांच पदों पर भर्ती से जुड़ा है। लिखित परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन के बाद आयोग ने चंदन सिंह समेत पांच अभ्यर्थियों का चयन किया था।

हालांकि असफल अभ्यर्थी अनिल कुमार ने चंदन सिंह के चयन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस मामले की अंतिम सुनवाई वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की पीठ में हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि प्रतिवादी का चयन गलत तरीके से किया गया है। वहीं आयोग ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता स्वयं इस प्रतियोगिता के लिए अर्ह नहीं पाया गया था।

प्रतिवादी चंदन सिंह की ओर से कहा गया कि उसे परीक्षा में 84.75 प्रतिशत अंक मिले हैं, जबकि याचिकाकर्ता को 81.25 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं। साथ ही याचिकाकर्ता के पास आवश्यक अनुभव प्रमाणपत्र भी नहीं है।

सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने पाया कि आयोग की ओर से चयन प्रक्रिया में कोई त्रुटि नहीं की गई है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए आयोग को चंदन सिंह की नियुक्ति के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

समीर अहमद हत्याकांड में आरोपी को जमानत

दूसरे मामले में किच्छा के चर्चित समीर अहमद हत्याकांड में शामिल जसविंदर सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद जसविंदर सिंह को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।

दरअसल, तृतीय सत्र न्यायाधीश रुद्रपुर की अदालत ने 22 दिसंबर 2025 को इस मामले में अंग्रेज सिंह उर्फ रिंकू, सुखदेव सिंह उर्फ सुक्खा, गुरचरण सिंह उर्फ बंटी, प्रश्नजीत सिंह संधू उर्फ सन्नी और जसविंदर सिंह को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही जुर्माना अदा न करने पर एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान भी रखा गया था।

जसविंदर सिंह ने निचली अदालत के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी और जमानत की मांग की। सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है और उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं हैं। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उसे जमानत देने के आदेश पारित कर दिए।

क्या है पूरा मामला

समीर अहमद के भाई ने 3 मई 2018 को किच्छा थाने में तहरीर देकर बताया था कि वह, उसका भाई और आरिफ वर्ष 2017 में प्रॉपर्टी का काम करते थे। लेनदेन के हिसाब को लेकर विवाद होने पर आरोपियों ने उन पर गोलीबारी कर दी, जिसमें समीर अहमद की मौत हो गई। पुलिस जांच में पांचों आरोपियों की संलिप्तता सामने आई थी।