बजट सत्र: दूसरे दिन सदन में 11 विधेयक पेश, ‘देवभूमि परिवार’ बिल बना चर्चा का केंद्र

बजट सत्र: दूसरे दिन सदन में 11 विधेयक पेश, ‘देवभूमि परिवार’ बिल बना चर्चा का केंद्र

देहरादून/गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में चल रहे बजट सत्र का मंगलवार को दूसरा दिन रहा। सत्र के दूसरे दिन सरकार ने सदन के पटल पर 11 विधेयक पेश किए,

जिनमें देवभूमि परिवार विधेयक-2026 सबसे प्रमुख रहा। इसके साथ ही प्रश्नकाल के दौरान विभिन्न विभागों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी सामने आईं।

‘देवभूमि परिवार’ बिल से बनेगा एकीकृत परिवार डेटाबेस

राज्य सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक पारदर्शी तरीके से सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से देवभूमि परिवार विधेयक-2026 सदन में पेश किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस विधेयक के कानून बनने के बाद प्रदेश में एक एकीकृत और सत्यापित परिवार-आधारित डेटाबेस “देवभूमि परिवार” की स्थापना की जाएगी।

इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों में बिखरे लाभार्थी डेटा को एक मंच पर लाकर योजनाओं के संचालन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समन्वित बनाना है।

देवभूमि परिवार आईडी में परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य को मुखिया के रूप में दर्ज किया जाएगा।

इससे परिवार-आधारित डेटा का एक विश्वसनीय स्रोत तैयार होगा, जिसे सरकार की विभिन्न योजनाओं के संचालन में उपयोग किया जा सकेगा।

सरकार का कहना है कि अभी अलग-अलग विभाग अपनी योजनाओं के लिए अलग-अलग लाभार्थी डेटाबेस का उपयोग करते हैं, जिससे आंकड़ों की पुनरावृत्ति, सत्यापन की जटिल प्रक्रियाएं और विभागों के बीच समन्वय की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

नए प्रावधान के तहत राज्य में एकीकृत परिवार स्तरीय डेटा भंडार स्थापित किया जाएगा, जो सभी विभागों के लिए लाभार्थियों की जानकारी का Single Source of Truth होगा।

इससे योजनाओं का लक्षित क्रियान्वयन और जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी व्यवस्था डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट-2023 के प्रावधानों के अनुरूप संचालित की जाएगी, ताकि नागरिकों के डेटा की सुरक्षा, पारदर्शिता और सहमति सुनिश्चित की जा सके।

सदन में पेश हुए 11 विधेयक

बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में कुल 11 विधेयक पेश किए गए। इनमें प्रमुख हैं—

  • उत्तराखंड दुकान और स्थापना (रोजगार विनियमन और सेवा-शर्त) (संशोधन) विधेयक 2026
  • उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2026
  • उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2026
  • समान नागरिक संहिता, उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक 2026
  • उत्तराखंड लोक सेवा आरक्षण अधिनियम 1993 (संशोधन) विधेयक 2026
  • उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) विधेयक 2026
  • उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक 2026
  • उत्तराखंड भाषा संस्थान (संशोधन) विधेयक 2026
  • उत्तराखंड देवभूमि परिवार विधेयक 2026
  • उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026
  • उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक 2026

चार साल में 819 पंचायत भवनों का पुनर्निर्माण

प्रश्नकाल के दौरान पंचायतीराज विभाग से जुड़ी जानकारी देते हुए मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि प्रदेश में कुल 5867 पंचायत भवन हैं। इनमें से 1134 भवन लंबे समय से जर्जर अवस्था में थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर अभियान चलाकर अब तक 819 पंचायत भवनों का पुनर्निर्माण किया जा चुका है, जबकि शेष भवनों के नवीनीकरण का कार्य जारी है।

सात हजार किमी से अधिक सड़कें गड्ढा मुक्त

लोक निर्माण विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में मानसून से पहले 3134 किमी और मानसून के बाद 10 नवंबर 2025 तक 4149.17 किमी सड़कों को गड्ढा मुक्त किया गया।

इस दौरान अकेले हरिद्वार जिले में 313 किमी से अधिक सड़कें गड्ढा मुक्त की गईं।

तीर्थ स्थलों के लिए रोपवे परियोजनाएं

पर्यटन विभाग के अनुसार राज्य में कई प्रमुख तीर्थस्थलों को रोपवे से जोड़ने की योजना पर काम जारी है।

  • कद्दूखाल–सुरकंडा देवी मंदिर रोपवे पीपीपी मोड में शुरू
  • ठुलीगाड़–पूर्णागिरी रोपवे (चम्पावत) निर्माणाधीन
  • जानकी चट्टी–यमुनोत्री मंदिर रोपवे (उत्तरकाशी) प्रस्तावित
  • गौरीकुंड–केदारनाथ और गोविंदघाट–हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाएं प्रक्रियाधीन

वनाग्नि रोकने के लिए पिरूल खरीद अभियान

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने सदन में बताया कि चीड़ के जंगलों में लगने वाली आग को रोकने के लिए सरकार ने ग्रामीणों से 5,532 टन पिरूल (चीड़ की पत्ती) खरीदा है। इस लक्ष्य को अब बढ़ाकर 8,555 टन कर दिया गया है।

सरकार ने इसके लिए 5 करोड़ 42 लाख रुपये का पिरूल खरीदा है। साथ ही राज्यभर में 1,239 जागरूकता कैंप लगाए गए हैं और ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट कमेटियां गठित की गई हैं। इन समितियों को 30 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

वनाग्नि नियंत्रण में लगे फायर वाचर्स के लिए पहली बार 10 लाख रुपये का सामूहिक बीमा भी किया गया है। पिछले वर्ष 5,600 फायर वाचर्स ने वनाग्नि रोकने में योगदान दिया था।

उपनल कर्मियों के लिए बजट में बड़ा प्रावधान

सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में पूर्व उपनल कर्मियों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन व्यवस्था लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके लिए बजट में 289 करोड़ 98 लाख 29 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों और श्रमिकों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मियों के हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।