दुर्गम सेवा के बाद सुगम में ट्रांसफर का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने सरकार को दिए निर्देश
नैनीताल। दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में स्थानांतरण न किए जाने को लेकर दायर याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका का निस्तारण करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि आगामी स्थानांतरण सत्र में याचिकाकर्ता का स्थानांतरण नियमावली के तहत किया जाए।
कोर्ट ने कहा कि असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मंजू यादव का स्थानांतरण एमबी पीजी कॉलेज हल्द्वानी, स्नातकोत्तर महाविद्यालय हल्दूचौड़, स्नातकोत्तर महाविद्यालय कपकोट और पीजी कॉलेज काशीपुर में रिक्त पड़े पदों में से किसी एक पर किया जाए।
क्या है मामला?
दरअसल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मंजू यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वे राजकीय पीजी कॉलेज जोशीमठ (चमोली) में गृह विज्ञान विषय की असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। जोशीमठ दुर्गम क्षेत्र में आता है और वे यहां तीन वर्ष की अनिवार्य दुर्गम सेवा पूरी कर चुकी हैं।
याचिका में बताया गया कि उन्होंने पिछले वर्ष सुगम क्षेत्र में स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन पंचायत चुनाव के कारण आचार संहिता लागू होने से स्थानांतरण सत्र शून्य घोषित कर दिया गया। इसके चलते उनका तबादला नहीं हो सका।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पंचायत चुनाव और आचार संहिता लागू होने के कारण पिछले वर्ष स्थानांतरण प्रक्रिया नहीं हो सकी। अब आगामी स्थानांतरण सत्र मई 2026 से शुरू होगा।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि आगामी स्थानांतरण सत्र में डॉ. मंजू यादव का स्थानांतरण सुगम क्षेत्र के किसी पीजी कॉलेज में किया जाए। अदालत के इस आदेश के बाद डॉ. मंजू यादव को बड़ी राहत मिली है।



