रिश्तों का बदलता गणित। 1500 शादियां, 2250 तलाक के मामले, हर महीने औसतन 188 आवेदन
वाराणसी। सात फेरों के साथ जीवनभर साथ निभाने का वादा करने वाले जोड़े अब पहले से अधिक संख्या में अदालत का रुख कर रहे हैं। वाराणसी में बीते एक वर्ष के दौरान जहां करीब 1500 शादियां हुईं, वहीं फैमिली कोर्ट में 2250 वैवाहिक विवाद और तलाक के मामले दर्ज किए गए।
आंकड़े बताते हैं कि हर महीने औसतन 188 आवेदन अदालत पहुंच रहे हैं और प्रतिदिन लगभग छह जोड़े अलग होने के लिए न्यायालय की शरण ले रहे हैं।
फैमिली कोर्ट के आंकड़ों के अनुसार एक वर्ष में 833 मामलों का निस्तारण भी किया गया। माहवार निस्तारण की बात करें तो जनवरी में 70, फरवरी में 34, मार्च में 108, अप्रैल में 73, मई में 116, जून में 111, जुलाई में 41, अगस्त में 84, सितंबर में 64 और नवंबर में 43 मामलों का समाधान हुआ, जबकि दिसंबर में 87 मामलों का निपटारा किया गया।
तलाक के प्रमुख कारण
अधिवक्ताओं के अनुसार अदालत में दाखिल मामलों के पीछे पांच प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं।
- शादी से पहले तथ्यों को छिपाना या गलत जानकारी देना
- पारिवारिक और आर्थिक विवाद
- दहेज प्रताड़ना और उत्पीड़न के आरोप
- नशे की लत और विवाहेतर संबंध
- आपसी संवाद की कमी और अविश्वास
फैमिली कोर्ट की अधिवक्ता सारिका दूबे का कहना है कि कई मामलों में शादी के कुछ ही महीनों बाद विवाद गहराकर अदालत तक पहुंच जाता है। वहीं, कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें 10 से 15 वर्ष साथ रहने के बाद दंपति अलगाव की राह चुन रहे हैं।
शुरुआती तीन साल अहम
वरिष्ठ अधिवक्ता भरत सिंह के अनुसार विवाह के शुरुआती तीन वर्ष दंपतियों के लिए सबसे संवेदनशील होते हैं। अधिकतर मामले शादी के तीन साल के भीतर ही अदालत तक पहुंच जाते हैं। 25 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवक-युवतियों में ऐसे मामलों की संख्या अधिक देखी जा रही है।
काउंसलिंग के बाद भी नहीं सुलझ रहे विवाद
फैमिली कोर्ट में पहले काउंसलिंग की प्रक्रिया अपनाई जाती है और कई मामलों में सुलह भी हो जाती है, लेकिन बड़ी संख्या में दंपति समझौते तक नहीं पहुंच पा रहे। सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, बढ़ती अपेक्षाएं और संवादहीनता रिश्तों पर दबाव बढ़ा रही है।
वाराणसी के ये आंकड़े रिश्तों में आ रहे बदलाव की ओर संकेत कर रहे हैं, जहां शादी से अधिक तलाक के मामले दर्ज होना समाज के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।



