फर्जी आयुर्वेदिक क्लीनिक और अवैध दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़। करोड़ों की दवाइयां और नकदी बरामद
देहरादून। आयुष पद्धति को बढ़ावा देने के बीच राजधानी में मिलावटी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाओं का बड़ा मामला सामने आया है।
सहस्त्रधारा रोड स्थित त्रिफला हर्बल सेंटर पर केंद्रीय आयुष मंत्रालय और उत्तराखंड आयुष विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर फर्जी क्लीनिक और अवैध दवा फैक्ट्री का खुलासा किया है।
छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध दवाइयां, लेबलिंग की हुई तैयार दवाएं और करीब एक करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए। फैक्ट्री और क्लीनिक को सील कर दिया गया है।
पांच साल से चल रहा था अवैध कारोबार
जांच में सामने आया कि क्लीनिक संचालक खुद को रजिस्टर्ड आयुष चिकित्सक बताकर प्रचारित कर रहा था, जबकि उसके पास कोई वैध डिग्री नहीं थी। वह एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ होने का दावा कर शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज का परामर्श दे रहा था।
आरोप है कि पिछले करीब पांच वर्षों से वह देशभर में ऑनलाइन माध्यम से मिलावटी दवाइयों की सप्लाई कर रहा था।
शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, कुछ लोगों को दवाइयां खाने के बाद साइड इफेक्ट होने की शिकायत मिली थी। इसके बाद केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने मामले की जानकारी मांगी। 20 फरवरी को केंद्रीय टीम देहरादून पहुंची और राज्य आयुष विभाग के साथ संयुक्त छापेमारी की।
कार्रवाई से पहले औषधि निरीक्षक मरीज बनकर क्लीनिक पहुंचे। वहां उन्हें करीब 7 हजार रुपये की दवाइयां दी गईं। जब डिग्री और लाइसेंस की जानकारी मांगी गई तो संचालक के पास कोई वैध प्रमाण पत्र नहीं मिला। इसके बाद मौके पर ही टीम ने छापा मारा।
खुद बनाता था दवाइयां, खुद ही लगाता था लेबल
छापेमारी के दौरान क्लीनिक परिसर से ग्राइंडर, मिक्सर, कच्चा माल और बड़ी संख्या में तैयार दवाओं के लेबल बरामद हुए।
जांच में पाया गया कि संचालक किसी कंपनी की अधिकृत दवा नहीं बेच रहा था, बल्कि स्वयं दवाइयां तैयार कर अपने लेबल के साथ बाजार में सप्लाई कर रहा था। इसके अलावा बिना वैध सेल लाइसेंस के होम्योपैथिक दवाइयों की बिक्री भी की जा रही थी।
सैंपल जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
केंद्रीय टीम दवाओं के सैंपल जांच के लिए अपने साथ ले गई है। आशंका जताई जा रही है कि आयुर्वेदिक दवाओं में अन्य चिकित्सा पद्धति की दवाओं की मिलावट हो सकती है।
राज्य आयुष विभाग ने सभी दवाइयां जब्त कर फैक्ट्री को सील कर दिया है और जिला न्यायालय में विधिक कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला आयुष पद्धति की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है और मिलावटखोरी के खिलाफ सख्त निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करता है।



