बिग ब्रेकिंग: गंभीर आर्थिक अपराधों में भी सख्त जमानत मानदंड लागू: सुप्रीम कोर्ट

गंभीर आर्थिक अपराधों में भी सख्त जमानत मानदंड लागू: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जघन्य अपराधों में जमानत देने के जो सिद्धांत लागू होते हैं, वही सिद्धांत गंभीर आर्थिक अपराधों पर भी समान रूप से लागू होंगे।

अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराध सीधे तौर पर नागरिकों की आर्थिक सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।

जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक आदतन आर्थिक अपराधी को जमानत दी गई थी। हाईकोर्ट ने सह अभियुक्त के आधार पर समानता (पैरिटी) के सिद्धांत से जमानत दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत देते समय आरोपी की भूमिका, आपराधिक इतिहास, फरारी, नकली पहचान का उपयोग और दोबारा अपराध की संभावना जैसे पहलुओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।

केवल सह-अभियुक्त को मिली जमानत के आधार पर राहत देना गंभीर त्रुटि है।

क्या है मामला,

मामला 11.52 करोड़ रुपये के खाद्यान्न घोटाले से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी ने ₹11.52 करोड़ से अधिक का माल लिया,

लेकिन सिर्फ ₹5.02 करोड़ का भुगतान किया। शेष राशि फर्जी दस्तावेजों, नकली पते और झूठी पहचान के जरिए हड़प ली गई।

आरोपी पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, धमकी और आईपीसी की धारा 409 सहित कई धाराओं में केस दर्ज है। जांच में सामने आया कि आरोपी करीब 20 महीने तक फरार रहा और इनाम घोषित होने के बाद गिरफ्तार हुआ।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी,

अदालत ने कहा कि समाज के लोगों की सुरक्षा केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

मेहनत की कमाई ठगने वालों के मामलों में जमानत पर विचार करते समय गवाहों पर प्रभाव, कानून-व्यवस्था और समाज के लिए खतरे को ध्यान में रखना जरूरी है।

इन तथ्यों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का जमानत आदेश रद्द कर अपील स्वीकार कर ली।