बिग ब्रेकिंग: 5 साल के सहमति संबंध के बाद शादी से इनकार को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट

5 साल के सहमति संबंध के बाद शादी से इनकार को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता: कलकत्ता हाईकोर्ट

कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि दो वयस्कों के बीच लंबे समय तक चले सहमति आधारित संबंध को केवल इसलिए दुष्कर्म का मामला नहीं बनाया जा सकता क्योंकि बाद में शादी नहीं हो पाई या संबंध टूट गया।

जस्टिस चैतालि चटर्जी दास ने अभियुक्त अनिर्बान मुखर्जी की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 417, 376, 313 और 506 के तहत दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

अदालत ने रिकॉर्ड, केस डायरी, धारा 164 सीआरपीसी के बयान, मेडिकल दस्तावेज और यात्रा विवरण का अवलोकन करने के बाद पाया कि वर्ष 2017 से 2022 तक दोनों के बीच सहमति से संबंध रहे। इस दौरान वे विभिन्न स्थानों की यात्रा पर गए और साथ रहे।

शिकायत में विवाह का झूठा वादा, यौन शोषण, गर्भपात के लिए मजबूर करने और धमकी देने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, अदालत ने पाया कि गर्भपात शिकायतकर्ता की सहमति से हुआ और आरोपी ने अभिभावक के रूप में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी किए।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि “विवाह का झूठा वादा” तभी सहमति को अवैध बनाता है जब वह शुरू से ही धोखे की नीयत से किया गया हो। केवल संबंध टूट जाने या विवाह न होने से पूर्व में दी गई सहमति स्वतः अमान्य नहीं हो जाती।

अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताते हुए पश्चिम मेदिनीपुर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में लंबित पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

हाईकोर्ट ने दोहराया कि असफल प्रेम संबंध को आपराधिक मुकदमे में बदलना कानून का उद्देश्य नहीं है।