महिला अपराधों पर DGP सख्त, तीन चौकी प्रभारी निलंबित, दिया अल्टीमेटम
रिपोर्ट- मीनाक्षी सिंह गौर
देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ते अपराध और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सोमवार को पुलिस मुख्यालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता डीजीपी उत्तराखंड दीपम सेठ ने की।
बैठक में महानिदेशक अभिसूचना एवं सुरक्षा अभिनव कुमार, एडीजी विजिलेंस व कानून-व्यवस्था वी. मुरुगेशन, एडीजी प्रशासन ए.पी. अंशुमान, गढ़वाल व कुमाऊँ रेंज के अधिकारी, एसटीएफ, साइबर, अपराध, दूरसंचार, कार्मिक और अभिसूचना से जुड़े सभी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में राज्य की मौजूदा कानून-व्यवस्था, हालिया गंभीर आपराधिक घटनाओं, पुलिस की कार्यप्रणाली और लंबित मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई।
अपराध नियंत्रण में ढिलाई बर्दाश्त नहीं: डीजीपी
डीजीपी दीपम सेठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अपराध नियंत्रण, महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में संवेदनशीलता और पुलिस की जवाबदेही से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
उन्होंने रेंज प्रभारियों, एसएसपी, एसटीएफ और पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों को निर्देश दिए कि लापरवाही, भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई तय है।
महिला हत्याकांडों में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई
देहरादून जनपद के ऋषिकेश में महिला की गोली मारकर हत्या के मामले में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर एम्स चौकी प्रभारी एसआई साहिल वशिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
वहीं, कोतवाली नगर देहरादून क्षेत्र में युवती के जघन्य हत्याकांड में प्रथम दृष्टया लापरवाही पर खुड़बुड़ा चौकी प्रभारी एसआई प्रद्युम्न नेगी को भी निलंबित किया गया है।
दोनों मामलों की जांच एसपी क्राइम विशाखा अशोक भदाणे को सौंपी गई है, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका पर 7 दिन में जांच रिपोर्ट तलब की गई है।
हरिद्वार गोलीकांड में भी निलंबन
हरिद्वार जनपद के भगवानपुर थाना क्षेत्र में रविदास जयंती के दौरान हुए संघर्ष और गोलीबारी की घटना में लापरवाही पर चुड़ियाला हल्का प्रभारी एसआई सूरत शर्मा को निलंबित किया गया है।
इस मामले की जांच एसपी क्राइम हरिद्वार जितेंद्र मेहरा को सौंपी गई है और अन्य कार्मिकों की भूमिका पर भी 7 दिन में रिपोर्ट मांगी गई है।
लैंड फ्रॉड मामलों में नई सख्त व्यवस्था
ऊधमसिंहनगर के सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण के बाद भूमि धोखाधड़ी (लैंड फ्रॉड) मामलों में बड़ी सख्ती का फैसला लिया गया है। डीजीपी ने निर्देश दिए कि अब ऐसे मामलों की अनिवार्य जांच सीओ स्तर पर की जाएगी।
सीओ यह तय करेगा कि मामला सिविल है या आपराधिक, उसके बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। सभी लंबित मामलों की निगरानी अब पुलिस मुख्यालय स्तर से की जाएगी।
सिविल मामलों में पुलिस दखल पर रोक
डीजीपी ने दो टूक कहा कि सिविल प्रकृति के मामलों में अनावश्यक पुलिस हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सतर्कता विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि भ्रष्ट आचरण में लिप्त पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ त्वरित और निर्णायक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



