“सम्मान के हकदार को बनाया आरोपी ” पूर्व सीएम ने भाजपा–पुलिस पर किया तीखा हमला
उत्तराखंड । कोटद्वार में ‘बाबा’ नाम को लेकर हुए विवाद और दीपक कुमार पर दर्ज FIR ने अब सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पुलिस प्रशासन और भाजपा सरकार पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति ने शांति और इंसानियत का पक्ष लिया, उसी को कटघरे में खड़ा कर दिया गया।
हरीश रावत ने सवाल उठाया कि दीपक कुमार को नामजद आरोपी बनाया गया, जबकि घटना में शामिल बाहर से आए 30–40 लोगों को ‘अज्ञात’ दिखाया गया, जबकि वीडियो फुटेज में चेहरे साफ दिख रहे हैं।
लिखित शिकायत में नाम व वाहन नंबर तक दर्ज हैं। उन्होंने इसे चयनात्मक पुलिसिंग करार देते हुए कहा, “सबूत होते हुए भी असली दोषियों को बचाया जा रहा है।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “दीपक की भूमिका संवाद और शांति की थी। जिसे सम्मानित किया जाना चाहिए था, उसी पर FIR दर्ज कर दी गई।”
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाइयाँ सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाती हैं और यह उत्तराखंड की संस्कृति नहीं है। भाजपा पर हुड़दंगी संस्कृति को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए रावत ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
घटना का संदर्भ
गणतंत्र दिवस पर एक मुस्लिम व्यापारी की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द को लेकर विवाद हुआ। वायरल वीडियो में दीपक कुमार बुजुर्ग दुकानदार के पक्ष में खड़े दिखे और खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताते हुए भीड़ का सामना किया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर इंसानियत की मिसाल बन गया।
FIR और पुलिस का पक्ष
31 जनवरी की रात तीन FIR दर्ज हुईं। एक FIR दीपक कुमार व विजय रावत के खिलाफ (मारपीट, धमकी, शांति भंग) दुकानदार की शिकायत पर चार लोगों के खिलाफ,पुलिस की FIR में करीब 40 लोगों पर सांप्रदायिक नारेबाजी व वैमनस्य के आरोप। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है, वीडियो साक्ष्यों से पहचान की जा रही है, फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
राहुल गांधी ने दीपक को “भारत का हीरो” बताया। कांग्रेस नेताओं ने इसे ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया।घटना के बाद दीपक की लोकप्रियता में तेज उछाल—फेसबुक 1,500 से 4.3 लाख+, इंस्टाग्राम 1,000 से 5 लाख+ फॉलोअर्स।
मामला अब कानून, राजनीति और सामाजिक एकता के चौराहे पर है। सवाल यही है—न्याय निष्पक्ष होगा या इंसानियत की आवाज़ पर ही कार्रवाई जारी रहेगी?



