बड़ी खबर: सीनियर महिला अधिकारी ने डीएम पर लगाए उत्पीड़न के गंभीर आरोप, मुख्यमंत्री से शिकायत

सीनियर महिला अधिकारी ने डीएम पर लगाए उत्पीड़न के गंभीर आरोप, मुख्यमंत्री से शिकायत

रिपोर्ट- राजकुमार धीमान
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक सीनियर क्लास-वन महिला अधिकारी द्वारा जिलाधिकारी (डीएम) पर उत्पीड़न और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए जाने से प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।

यह शिकायत क्लेमेनटाउन कैंटोनमेंट बोर्ड की मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) एवं रक्षा मंत्रालय के अधीन केंद्रीय सेवा की अधिकारी अंकिता सिंह द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मुख्य सचिव को भेजे गए एक पत्र के माध्यम से की गई है।

शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा कानून का दुरुपयोग करते हुए एक महिला केंद्रीय अधिकारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। पत्र की प्रतिलिपि राज्यपाल, राष्ट्रीय महिला आयोग सहित अन्य उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई है।

सीईओ अंकिता सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 31 जनवरी 2026 को जिला प्रशासन ने “आकस्मिक प्रावधानों” का हवाला देते हुए शनिवार शाम क्लेमेनटाउन कैंट बोर्ड के वाहन को अचानक अधिगृहित (रेक्विज़िशन) करने का आदेश जारी किया। जबकि कैंटोनमेंट बोर्ड रक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है।

पत्र के अनुसार, शाम 6:30 बजे से 8:00 बजे के बीच आरटीओ, पुलिस और अन्य अधिकारियों को महिला अधिकारी के कार्यालय एवं आवास पर भेजा गया, जिससे कार्यालय कर्मियों पर दबाव बना और मानसिक प्रताड़ना की स्थिति उत्पन्न हुई।

सीईओ ने इस आदेश को “अवैध” करार देते हुए सवाल उठाया है कि जब निजी वाहन किराए पर लेने या राज्य सरकार के अन्य विभागों के वाहन उपलब्ध थे, तब केवल कैंट बोर्ड के वाहन को ही क्यों अधिगृहित किया गया।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि इससे पहले जुलाई 2025 में पंचायत चुनावों के दौरान भी एक महिला केंद्रीय अधिकारी पर अत्यधिक प्रशासनिक दबाव डाला गया था।

पत्र में कैंटोनमेंट एक्ट, 2006 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि रक्षा मंत्रालय के अधीन वाहनों को जिला प्रशासन बिना सक्षम रक्षा संपदा प्राधिकरण की अनुमति के अधिगृहित नहीं कर सकता।

सीईओ अंकिता सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को “बार-बार दोहराए जा रहे दुरुपयोग” की श्रेणी में रखते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि जांच समिति में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय महिला आयोग के प्रतिनिधि शामिल किए जाएं।शिकायत की प्रतिलिपि मंडलायुक्त, डीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, सीडीओ और आरटीओ को भी भेजी गई है।

वहीं दूसरी ओर, जिलाधिकारी सविन बंसल ने जिला सूचना कार्यालय के माध्यम से जारी अपने पक्ष में कहा है कि कैंट बोर्ड की सीईओ आगामी जनगणना से जुड़ी अति-आवश्यक दो बैठकों में अनुपस्थित पाई गई थीं।

जनगणना कार्य निदेशक की नाराजगी के बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया, और इसी कार्रवाई को आधार बनाकर अब आरोप लगाए जा रहे हैं।

हालांकि, जिला सूचना कार्यालय के जवाब में सीईओ द्वारा लगाए गए उत्पीड़न और वाहन अधिग्रहण से जुड़े आरोपों पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रशासन की ओर से कैंट बोर्ड के वाहन को अधिगृहित करने की कार्रवाई तीसरी बार की गई है, जिस पर अब सीईओ अंकिता सिंह ने खुलकर अपनी आपत्ति और प्रतिक्रिया दर्ज कराई है।