वक्फ बोर्ड के नामित सदस्यों की वैधता पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार व बोर्ड को नोटिस
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड के नामित सदस्यों की सदस्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर अहम सुनवाई करते हुए वक्फ बोर्ड और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
अवकाशकालीन न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की एकल पीठ ने दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 मार्च की तिथि निर्धारित की गई है।
शनिवार को हुई सुनवाई में हल्द्वानी निवासी नसीम अहमद वारसी द्वारा दायर याचिका पर कोर्ट ने विचार किया। याचिकाकर्ता का कहना है कि वक्फ बोर्ड में कुल 11 सदस्य होते हैं, जिनमें 5 नामित और 6 निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
नियमों के अनुसार निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल नए बोर्ड या कार्यकारिणी के गठन तक रहता है, जबकि नामित सदस्यों का कार्यकाल स्थायी नहीं होता।
याचिका में बताया गया कि वर्ष 2022 में वक्फ बोर्ड का चुनाव हुआ था, लेकिन उसके बाद भी नामित सदस्य लगातार अपने पदों पर बने हुए हैं, जो संशोधित नियमावली के खिलाफ है।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि वक्फ बोर्ड संशोधित नियमावली 2025 की धारा 14 में स्पष्ट प्रावधान है कि नामित सदस्यों का कार्यकाल स्थायी नहीं हो सकता और नए बोर्ड के गठन के बाद उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि नियमों के विपरीत पद पर बने नामित सदस्यों को तत्काल हटाया जाए।
वहीं, सुनवाई के दौरान वक्फ बोर्ड की ओर से याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए इसे खारिज किए जाने की मांग की गई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।



