लोकपाल मनरेगा की जांच में गुदमी पंचायत में भ्रष्टाचार प्रमाणित, ₹1.01 लाख की वसूली के आदेश
- ग्राम वित्त जांच पूरी होते ही जुर्माना और बढ़ने के संकेत**
रिपोर्ट- मयंक पंत
चंपावत। जनपद चम्पावत की ग्राम पंचायत गुदमी में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों में लंबे समय से लगे भ्रष्टाचार के आरोप आखिरकार सही साबित हो गए हैं।
लोकपाल मनरेगा द्वारा की गई विस्तृत जांच में सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि हुई है, जिसके आधार पर खंड विकास अधिकारी, चम्पावत ने दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों से ₹1,01,677 की वसूली के आदेश जारी किए हैं।
जारी आदेश के अनुसार यह धनराशि ग्राम पंचायत गुदमी में मनरेगा के अंतर्गत किए गए कार्यों में अनियमित व्यय के रूप में पाई गई है। लोकपाल की जांच आख्या में इन अनियमितताओं को स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है।
इसके बाद संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि उक्त राशि नियमानुसार सरकारी खाते में जमा कराई जाए।
लोकपाल की जांच में जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यकाल को संदिग्ध पाया गया है, उनमें ग्राम विकास अधिकारी तपन गड़कोटी, तत्कालीन उपकार्यक्रम अधिकारी (मनरेगा) अमित पाण्डेय, कनिष्ठ अभियंता संदीप जोशी, तत्कालीन ग्राम रोजगार सहायक राजेन्द्र खर्कवाल तथा ग्राम रोजगार सहायक सुरेश जोशी शामिल हैं।
इनके कार्यकाल के दौरान मनरेगा कार्यों के क्रियान्वयन और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता का कहना है कि उसकी शिकायत में मनरेगा से निर्मित सीसी रोड का विशेष रूप से उल्लेख किया गया था, जिसे पोर्टल पर बिना सीमेंट और निर्धारित रेट के दर्शाकर पूर्ण दिखा दिया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, खंड विकास अधिकारी द्वारा लोकपाल के पत्र का समय पर उत्तर न देने के कारण यह गड़बड़ी सही मान ली गई, जिसकी पुष्टि के लिए उसने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी भी प्राप्त की है।
शिकायतकर्ता ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिला विकास अधिकारी स्तर पर ग्राम वित्त (15वां वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग आदि) से संबंधित शिकायत की जांच आख्या अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जैसे ही ग्राम वित्त की जांच पूरी होगी, वसूली की राशि में और वृद्धि हो सकती है तथा दोषियों पर अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई भी तय की जा सकती है।
इधर, ग्रामीणों ने मांग की है कि कार्रवाई केवल वसूली तक सीमित न रहे, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लग सके।



