फार्मासिस्ट भर्ती का परिणाम विवादों में, एक अभ्यर्थी का चयन स्थगित
देहरादून। उत्तराखण्ड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड द्वारा चिकित्सा शिक्षा उत्तराखण्ड विभागान्तर्गत राजकीय मेडिकल कॉलेजों में फार्मासिस्ट (भेषज) के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिए जारी अंतिम परीक्षा परिणाम में एक अभ्यर्थी का चयन नियमों के उल्लंघन के कारण स्थगित कर दिया गया है।
चयन बोर्ड ने विज्ञापन संख्या उ०चि०से०च०बो०/परी०/15/2024-25/749, दिनांक 19 अक्टूबर 2024 के माध्यम से कुल 73 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी।
इसके सापेक्ष बोर्ड कार्यालय द्वारा पत्र संख्या उ०चि०से०च०बो०/परी०/15/2024-25/65, दिनांक 17 जनवरी 2026 को 65 पदों का अंतिम परीक्षा परिणाम जारी किया गया।
बोर्ड द्वारा जारी परिणाम के पुनः अवलोकन के दौरान यह तथ्य सामने आया कि अंतिम सूची के क्रम संख्या 57 पर चयनित अभ्यर्थी Mrs. Vandana Bhatt (अनुक्रमांक 9250601209) ने अपने ऑनलाइन आवेदन पत्र में राज्य आन्दोलनकारी आश्रित प्रमाण पत्र संख्या 491 अंकित किया था।
जबकि अभिलेख सत्यापन के समय उन्होंने राज्य आन्दोलनकारी आश्रित प्रमाण पत्र संख्या 276, दिनांक 06 जून 2025 प्रस्तुत किया, जो ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 15 जनवरी 2025 के बाद निर्गत किया गया है।
भर्ती विज्ञापन के नियम 23-ए एवं 23-बी के अनुसार अभ्यर्थी को ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि तक सभी वैध आरक्षण संबंधी प्रमाण पत्र एवं आवश्यक अर्हताएं धारित करना अनिवार्य है।
निर्धारित तिथि के बाद निर्गत प्रमाण पत्र को स्वीकार नहीं किया जा सकता। इन नियमों के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि यदि वांछित अर्हताओं की पुष्टि नहीं होती है तो अभ्यर्थन निरस्त किया जा सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी अभ्यर्थी की होगी।
नियमों के उल्लंघन को देखते हुए चयन बोर्ड ने Mrs. Vandana Bhatt का फार्मासिस्ट (भेषज) पद पर चयन फिलहाल स्थगित कर दिया है।
हालांकि, अभ्यर्थी को अवसर देते हुए बोर्ड ने कहा है कि यदि वे इस संबंध में कोई प्रत्यावेदन प्रस्तुत करना चाहती हैं तो वे 22 जनवरी 2026 को सांय 5:00 बजे तक डाक, ई-मेल अथवा स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकती हैं।
यदि निर्धारित तिथि तक कोई प्रत्यावेदन प्राप्त नहीं होता है, तो चयन बोर्ड समान श्रेणी-उपश्रेणी की प्रवीणता सूची में उपलब्ध अगले योग्य अभ्यर्थी को चयनित कर संस्तुति करेगा। इसके बाद संबंधित अभ्यर्थी का उक्त पद के लिए कोई दावा मान्य नहीं होगा।
इस मामले के सामने आने के बाद भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और आरक्षण नियमों के सख्त अनुपालन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।



